सेक्टर कमर्शियल नीति में होगा बड़ा संशोधन, सेक्टर सड़कों के लिए भूमि नीति में बदलाव की तैयारी में जेडीए
शहर की यातायात व्यवस्था सुव्यवस्थित
राजधानी में सेक्टर सड़कों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से जयपुर विकास प्राधिकरण ने 22 वर्ष पुरानी सेक्टर कमर्शियल नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू। वर्तमान में शहर के मास्टर प्लान में कई सेक्टर सड़कों का प्रस्ताव है, लेकिन जमीन की उपलब्धता और खातेदारों की अनिच्छा के चलते अधिकांश परियोजनाएं अटकी।
जयपुर। राजधानी में सेक्टर सड़कों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से जयपुर विकास प्राधिकरण ने 22 वर्ष पुरानी सेक्टर कमर्शियल नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में शहर के मास्टर प्लान में कई सेक्टर सड़कों का प्रस्ताव है, लेकिन जमीन की उपलब्धता और खातेदारों की अनिच्छा के चलते अधिकांश परियोजनाएं अटकी हुई हैं। इसके चलते जेडीए अब मौजूदा नीति में संशोधन पर विचार कर रहा है। जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की स्वीकृति के बाद नीति में बदलाव के लिए अतिरिक्त आयुक्त प्रतिभा पारीक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति मौजूदा नीति की समीक्षा कर आवश्यक संशोधनों के सुझाव देगी।
शहर की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जा सके
राजधानी के जेडीए रीजन के विस्तार के बाद अब सेक्टर रोडों के विस्तार करने पर काम करेगा जिससे शहर की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जा सके। दरअसल 21 जुलाई 2003 को जेडीए की उच्चाधिकार समिति की बैठक में सेक्टर कमर्शियल नीति लागू करने का निर्णय लिया गया था और 31 मार्च 2004 को आदेश जारी कर इसे लागू किया गया। इस नीति का उद्देश्य 80 फीट या उससे अधिक चौड़ी सेक्टर सड़कों के निर्माण के लिए खातेदारों से आपसी सहमति से भूमि प्राप्त करना था, जिससे लंबी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से बचा जा सके। मौजूदा नीति के तहत यदि 100 फीट चौड़ी सड़क बनानी होती है तो सड़क की चौड़ाई के दोनों ओर 50-50 फीट चौड़ी पट्टी में जमीन ली जाती है, जिसे सेक्टर कमर्शियल पट्टी कहा जाता है।
इनमें से एक पट्टी की 25 प्रतिशत विकसित व्यावसायिक भूमि खातेदारों को मुआवजे के रूप में दी जाती है, जबकि दूसरी पट्टी जेडीए अपने पास रखता है। इस पट्टी की नीलामी से प्राप्त राशि से सड़क निर्माण का खर्च वहन किया जाता है। समय-समय पर इस नीति में कुछ संशोधन भी किए गए। 6 जुलाई 2012 को 750 वर्गमीटर से बड़े एकल भूखंडों को सेक्टर कमर्शियल पट्टी से मुक्त रखते हुए उनसे फ्रंटेज चार्ज लेने का प्रावधान किया गया। इसके बाद में 27 सितंबर 2021 को विभिन्न चौड़ाई की सड़कों के लिए फं्रटेज चार्ज की दरें तय की गईं। वहीं 28 फरवरी 2023 के आदेश में खातेदारों को 20 प्रतिशत आवासीय और 5 प्रतिशत व्यावसायिक भूमि या वैकल्पिक रूप से 15 प्रतिशत व्यावसायिक भूमि देने का विकल्प दिया गया।
स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से भी कई परियोजनाएं अटकी
हालांकि 22 साल में यह नीति अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो पाई। इसके अलावा 750 वर्गमीटर से छोटे भूखंडों और हाउसिंग सोसायटियों के मामलों में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से भी कई परियोजनाएं अटकी रहीं। प्रस्तावित नई नीति में सड़क के लिए केवल उतनी ही भूमि अधिग्रहित की जाएगी जितनी सड़क की चौड़ाई के लिए आवश्यक होगी। खातेदारों को इसके बदले 20 प्रतिशत आवासीय और 5 प्रतिशत व्यावसायिक भूमि मुआवजे के रूप में दी जाएगी। यह भूखंड सड़क किनारे देने के बजाय जेडीए द्वारा विकसित किसी अन्य योजना में आवंटित किए जा सकते हैं।

Comment List