हरीश रावत ने पीएम दौरे को बताया चुनावी झमेला : एक्सप्रेस वे का नाम भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखने की मांग, देहरादून एक्सप्रेस हाईवे गिनाई खामियां

हरीश रावत का तंज: एक्सप्रेस-वे 'सौगात' या जाम की मुसीबत?

हरीश रावत ने पीएम दौरे को बताया चुनावी झमेला : एक्सप्रेस वे का नाम भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखने की मांग, देहरादून एक्सप्रेस हाईवे गिनाई खामियां

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे को सौगात तो माना, लेकिन खराब प्लानिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने चेतावनी दी कि आंतरिक रोड कनेक्टिविटी की कमी से देहरादून में भीषण जाम और 'बॉटलनेक' की समस्या बढ़ेगी। रावत ने एक्सप्रेस-वे का नाम बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर रखने की पुरजोर मांग की है।

देहरादून । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य के दौरे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है साथ ही दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे को उत्तराखंड वासियों के लिए सौगात बताया है, उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही देहरादून दिल्ली एक्सप्रेस वे का लोकार्पण किया, किंतु इस लोकार्पण के साथ ही देहरादून में जाम भी बढ़ेगा और बॉटल नेक भी खड़े होंगे। देहरादून के डिफेंस कॉलोनी स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री उत्तराखंड आए, क्योंकि चुनाव का वक्त अब नजदीक है, और यह सब चुनावी झमेला है।

उन्होंने दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस हाईवे को उत्तराखंड के लिए सौगात बताते हुए कुछ खामियां भी गिनाई है। हरीश रावत ने कहा की प्लानिंग की कमी के कारण आने वाले दो, ढाई साल से या उससे भी अधिक समय तक देहरादून को घुटन का सामना करना पड़ सकता है। देहरादून में जाम भी बढ़ेगा और बोटलनेक खड़े होंगे। आने वाले समय में देहरादून वासियों के सामने जाम की समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के निवासियों को एक्सप्रेस वे तो चाहिए था, लेकिन इसके साथ हमको इंटरनल रोड़ कनेक्टिविटी में सुधार करने की भी आवश्यकता है।

तभी इस एक्सप्रेसवे के साथ तारतम्य बनाया जा सकता है। इसी तारतम्य के अभाव की वजह से एक्सप्रेस वे उत्तराखंड वासियों के लिए कुछ समय तक मुसीबत का कारण बन सकता है। हालांकि उन्होंने माना कि दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के लिए सौगात स्वरूप है। मगर इसके साथ-साथ आंतरिक प्लानिंग की कमी और राज्य सरकार की अदूरदर्शिता के कारण यह एक्सप्रेस वे हमारे लिये वरदान की बजाय कुछ समय तक के लिए परेशानी का सबब बनने जा रहा है।

हरीश रावत का कहना है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आंतरिक मार्गों के सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई थी, मगर उन प्रक्रियाओं को वर्तमान भाजपा सरकार इन नौ वर्षों में आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का नाम बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मेरे मन में यह भाव आया कि आज मानवता के शिखर पुरुष संविधान रचयिता बाबा साहब की 135वीं जयंती है। इस एक्सप्रेसवे का नामकरण अगर उनके नाम पर हो जाता, तो बहुत अच्छा होता।

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