चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाता बजट
2047 के लक्ष्य की दिशा में
राजस्थान का बजट 2026-27 सामाजिक सरोकारों की जीवंत अभिव्यक्ति है।
राजस्थान का बजट 2026-27 सामाजिक सरोकारों की जीवंत अभिव्यक्ति है। विशेष रूप से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधान यह स्पष्ट करते हैं कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक जनकल्याण और मानवीय गरिमा से जोड़कर देख रही है। बजट में किए गए प्रावधानों का विश्लेषण यह सिद्ध करता है कि यह बजट निरोगी राजस्थान की दिशा में ठोस, संरचनात्मक और दूरगामी सोच का परिणाम है। सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ की स्थापना का निर्णय ऐतिहासिक है। इसके साथ ही जिला मुख्यालयों पर मेंटल हेल्थ केयर सेल की स्थापना, जिला चिकित्सालयों में मनोचिकित्सकों के साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलर की नियुक्ति तथा विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्ट्रेस मैनेजमेंट एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का प्रावधान, मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह पहल न केवल अवसाद, तनाव और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने में सहायक होगी, बल्कि युवाओं और विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक मानसिक वातावरण भी निर्मित करेगी।
जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता :
जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता और रोकथाम पर विशेष बल दिया गया है। पंचायत स्तर पर आरोग्य शिविरों का आयोजन कर मातृ शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, नॉन कम्युनिकेबल एवं लाइफस्टाइल रोगों की जांच और परामर्श सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय व्यापक जनहित का परिचायक है। इससे ग्रामीण और वंचित वर्ग तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी और समय रहते रोगों की पहचान संभव हो सकेगी। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना और निरोगी राजस्थान योजना के अंतर्गत ऐसे असहाय, विमंदित और लावारिस रोगियों को भी निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की गई है, जो दस्तावेजों के अभाव में अब तक उपचार से वंचित रह जाते थे। यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही मानवीय संवेदना से भी परिपूर्ण है। इससे स्पष्ट है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिकार के रूप में देख रही है, न कि सुविधा के रूप में।
चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम :
बच्चों की चिकित्सा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जेके लोन चिकित्सालय, जयपुर में 500 बेड क्षमता के आईपीडी टावर की स्थापना 75 करोड़ रुपये की लागत से किए जाने का प्रावधान किया गया है। बच्चों के लिए उन्नत उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में निवेश है। यह कदम प्रदेश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा। चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञता के विस्तार की दिशा में भी बजट दूरदर्शी है। चिकित्सा महाविद्यालयों में पीजी सीटों में 150 सीटों की वृद्धि तथा नॉन टीचिंग अस्पतालों में 150 डीएनबी सीटों पर कोर्स प्रारंभ करने का निर्णय चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही जेरियाट्रिक केयर में पीजी नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी कोर्स प्रारंभ किए जाने का प्रावधान वृद्धजनों की विशेष स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। यह पहल जनसंख्या के बदलते आयु ढांचे के अनुरूप है।
आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान :
चिकित्सा उपकरणों के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। राजमेस के अंतर्गत संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध अस्पतालों में लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 31 क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपए की राशि से विभिन्न उपकरण स्थापित किए जाने का प्रावधान है। यह निवेश गंभीर रोगियों के उपचार में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए फायर डिटेक्शन सिस्टम, स्प्रिंकलर और अन्य उपकरण स्थापित करने हेतु लगभग 300 करोड़ रुपए व्यय किए जाने का निर्णय लिया गया है। हाल के वर्षों में अस्पतालों में आग की घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय समयोचित और अत्यंत आवश्यक है। इससे मरीजों और चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
अत्याधुनिक विश्राम गृह :
मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जयपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा और जोधपुर के चिकित्सा महाविद्यालयों के मुख्य चिकित्सालयों में 500 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक विश्राम गृह स्थापित किए जाएंगे। यह पहल विशेष रूप से दूर दराज से आने वाले मरीजों के परिवारों के लिए राहतकारी सिद्ध होगी। स्वास्थ्य सेवा केवल ऑपरेशन थिएटर या वार्ड तक सीमित नहीं होतीय यह मरीज और उसके परिजन दोनों के लिए सहायक वातावरण निर्मित करने का दायित्व भी निभाती है। आयुष चिकित्सा पद्धति के सुदृढ़ीकरण पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। आयुर्वेद चिकित्सालयों को जिला आयुर्वेद चिकित्सालयों में क्रमोन्नत करना, विभिन्न ब्लॉकों में आयुर्वेद चिकित्सालयों का उन्नयन, नए आयुष चिकित्सालयों की स्थापना तथा जर्जर भवनों के जीर्णोद्धार हेतु 10 करोड़ रुपये का प्रावधान पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के पुनरुत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
2047 के लक्ष्य की दिशा में :
मानसिक स्वास्थ्य से लेकर जेरियाट्रिक केयर तक, बाल चिकित्सा से लेकर आयुष चिकित्सा तक,और उपकरणों के आधुनिकीकरण से लेकर अग्नि सुरक्षा तक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया गया है। यह बजट केवल रोग के उपचार की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के संरक्षण की बात करता है। पंचायत स्तर पर आरोग्य शिविरों के माध्यम से जागरूकता, विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य सत्रों के माध्यम से निवारक दृष्टिकोण, और असहाय रोगियों के लिए निःशुल्क उपचार एक मानवीय, उत्तरदायी और संवेदनशील शासन की पहचान हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में इस प्रकार की व्यापक, संरचनात्मक और बहु आयामी पहलें राजस्थान को विकसित राजस्थान 2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं। राजस्थान का यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण का रोडमैप है।
-कालीचरण सर्राफ
विधायक एवं पूर्व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, राजस्थान
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

Comment List