द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास बहाली की सार्थक पहल
भारत-कनाडा की नई शुरूआत
पिछले सप्ताह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का चार दिवसीय भारत दौरा हुआ।
पिछले सप्ताह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का चार दिवसीय भारत दौरा हुआ। दौरा भी ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक भू-राजनीतिक गठबंधन टूट रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल युद्ध छिड़ा हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर गया है। भारत-कनाडा के संबंध पिछले कुछ वर्षों में गंभीर कूटनीतिक तनाव से गुजरे हैं। ऐसे में कार्नी की यह यात्रा केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं थी बल्कि द्विपक्षीय रिष्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की रूपरेखा तय करने, यूरेनियम की आपूर्ति, दुर्लभ खनिज समेत 17 समझौते हुए। इनमें सबसे प्रमुख 2.6 अरब डॉलर की दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति का वाणिज्यिक समझौता हुआ। जो भारत के लिए असैन्य परमाणु उूर्जा उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों की प्राप्ति और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
रक्षा उद्योग और व्यापार :
दोनों देश मिलकर छोटे और आधुनिक परमाणु रिएक्टर पर भी काम करेंगे। साथ ही रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाएंगे। इसी उद्देष्य से डिफेंस डॉयलाग शुरू करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2030 तक दोनों देशों ने द्विपक्षीय कारोबार 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है जिसके लिए मुक्त व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। कनाडा ने इस मौके पर भारत की पहल पर इंटरनेशनल सोलर एलायंस, बॉयोफ्यूल एलायंस में शामिल होने की घोषणा की। साथ ही कनाडा के विश्वविद्यालय भारत में परिसर खोलेंगे। भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया के बीच तकनीक और इनोवेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता, कुंडली में पल्स प्रोटीन सेंटर की स्थापना, एआईसीटीई और कनाडा की एजेंसी के बीच रिसर्च 300 इंटर्नशिप, दुर्लभ खनिजों को लेकर समझौता हुआ। एआई, हैल्थकेयर, कृषि और नवाचार में शिक्षण संस्थाओं के बीच 24 समझौते हुए।
सकारात्मकता की ओर बढ़ते कदम :
आईओआरए में कनाडा डॉयलाग पार्टनर बना। भारत-कनाडा संसदीय समूह की स्थापना, इंडिया कनाडा सीईओ फोरम का पुनर्गठन, भारत-कनाडा डिफेंस डायलाग की स्थापना की घोषणाएं हुईं। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ, पूरी मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौतियां हैं। इनके विरुद्ध दोनों का करीबी सहयोग दुनिया में षांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। मार्क कार्नी ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में कनाडा और भारत अपनी अर्थव्यवस्थाओं को अधिक स्वतंत्र अधिक विविधतापूर्ण और अधिक लचीला बनाने के लिए रूपांतरित कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच हुए समझौते एक नए और समृद्ध संबंध की शुरुआत है। यहां यह भी स्वीकारना होगा कि ऐसी पहल से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सकारात्मक बदलाव को बल मिलता है।
भारत-कनाडा की नई शुरूआत :
भारत-कनाडा संबंध वर्ष 2023-24 के दौरान खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या के आरोपों को लेकर काफी तनावपूर्ण रहे। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। परिणामस्वरूप दोनों देशों ने अपने-अपने राजनयिकों का वापस बुलाया, वीजा सेवाएं प्रभावित हुईं और व्यापार वार्ता ठप पड़ गई।
ऐसे माहौल में मार्क कार्नी का प्रधानमंत्री बनना और भारत का दौरा करना इस बात का संकेत है कि ओटावा अब बीती बातों को भुलाकर नई शुरुआत करना चाहता है। कार्नी की छवि एक अनुभवी अर्थशास्त्री और वैश्विक वित्त विशेषज्ञ की रही है, जिन्होंने बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड का नेतृत्व किया है। इसलिए उनका दृष्टिकोण अधिक आर्थिक केंद्रित और व्यावहारिक माना जा रहा है।
विश्वास बहाली पर जोर :
इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य विश्वास बहाली था। भारत की प्राथमिक चिंता रही है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक समूहों को राजनीतिक संरक्षण न मिले। वहीं, कनाडा मानवाधिकार और कानून के शासन की बात करता रहा है। कार्नी के दौरे से यह संकेत मिला कि दोनों पक्ष इन मुद्दों को सार्वजनिक टकराव की बजाय मामले को बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहते हैं। भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8-10 अरब डॉलर के आसपास रहा है जो संभावनाओं की तुलना में काफी कम है। पहले कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनामी पार्टनरषिप एग्रीमेंट सेपा पर बातचीत चल रही थी जो तनाव के कारण रुक गई। इस दौरे में संकेत मिला कि व्यापार वार्ता को चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू किया जा सकता है।
ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स :
कनाडा यूरेनियम, पोटाश और अन्य दुर्लभ खनिजों का बड़ा उत्पादक है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के लिए ये खनिज अहम हैं। कनाडा से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते की रणनीतिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। कार्नी वैश्विक स्तर पर जलवायु वित्त के बड़े समर्थक रहे हैं। भारत की नेट जीरो 2070 प्रतिबद्धता और ग्रीन ट्रांजिशन में कनाडाई निवेश की संभावनाएं इस यात्रा का अहम हिस्सा रहीं। कनाडा ने हाल के वर्षों में अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति घोषित की है, जिसमें भारत को एक प्रमुख साझेदार बताया गया है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच कनाडा भी एशिया में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। अब इस ओर पारदर्शिता के साथ प्रयास सुनिश्चित करने जरूरी है। कार्नी की वित्तीय पृष्ठभूमि भारत के डिजिटल भुगतान और फिनटेक इकोसिस्टम के साथ तालमेल बैठाने में मददगार साबित हो सकती है।
-महेश चंद्र शर्मा
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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