कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर केंद्र सरकार को घेरा : जमीनी स्तर की आवाजों की अनदेखी करने का लगाया आरोप, जयराम ने कहा- आदिवासी सुमदायों पर पड़ सकता है बुरा असर

रमेश ने सरकार के रुख में विसंगति की ओर भी किया इशारा

कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर केंद्र सरकार को घेरा : जमीनी स्तर की आवाजों की अनदेखी करने का लगाया आरोप, जयराम ने कहा- आदिवासी सुमदायों पर पड़ सकता है बुरा असर
ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा। जयराम रमेश ने कहा, सरकार विकास के नाम पर आदिवासी चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने पुनर्वास योजना पर सवाल उठाते हुए दावे को विरोधाभासी बताया। परियोजना में पोर्ट, एयरपोर्ट व टाउनशिप शामिल हैं। विपक्ष ने पर्यावरण और जनजातीय अधिकारों पर खतरे को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज की।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने शनिवार को ग्रेट निकोबार द्वीप में केंद्र की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना पर नये सिरे से चिंता जतायी। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए है कि इस परियोजना से आदिवासी समुदायों पर बुरा असर पड़ सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक बयान में सरकार के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि विकास कार्य स्थानीय आदिवासी लोगों की पर्याप्त चिंता किए बिना आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने केंद्र पर जमीनी स्तर की आवाजों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा, स्थानीय समुदायों की चिंताओं से बेखबर बुलडोजर आगे बढ़ रहा है। रमेश ने सरकार के रुख में विसंगति की ओर भी इशारा किया।

उन्होंने कहा कि यहां एक मौलिक विरोधाभास है। केंद्र सरकार का दावा है कि ग्रेट निकोबार बुनियादी ढांचा परियोजना से जनजातियों को कोई परेशानी या विस्थापन नहीं होगा, तो फिर पुनर्वास योजना क्यों? स्पष्ट रूप से यह दावा झूठा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित ग्रेट निकोबार बुनियादी ढांचा परियोजना, जिसे क्षेत्र के लिए रणनीतिक और आर्थिक मजबूती के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, उसमें एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा, टाउनशिप और बिजली बुनियादी ढांचे की योजना शामिल है। सरकार का तर्क है कि यह परियोजना शोंपेन और निकोबारी समुदायों सहित स्वदेशी जनजातियों के अधिकारों और आवासों की रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण विकास लायेगी।

विपक्षी दलों और कई कार्यकर्ताओं ने हालांकि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों और कमजोर जनजातीय समूहों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर बार-बार परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आगे बढ़ने से पहले अधिक पारदर्शिता, व्यापक परामर्श और सख्त सुरक्षा उपायों की मांग की है। वहीं सरकार ने दावा किया है कि सभी आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त कर ली गयी है और न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करने के लिए उपाय किये गये हैं। अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों के पास ग्रेट निकोबार द्वीप की स्थिति को देखते हुए परियोजना के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया है। कांग्रेस नेता की इस ताजा टिप्पणी ने विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और जनजातीय अधिकारों से जुड़ी इस राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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