पूर्व कुलपति डॉ. देव स्वरूप से जुड़े विवादों ने बढ़ाई चर्चा, राजस्थान यूनिवर्सिटी में हलचल
अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों की जांच
जयपुर। राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. देव स्वरूप से जुड़े मामलों ने एक बार फिर शिक्षा जगत में चर्चा तेज कर दी है। हाल ही में राजभवन द्वारा उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। डॉ. देव स्वरूप राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं और बाद के वर्षों में राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी महत्वपूर्ण दायित्व संभालते रहे। हाल में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों की जांच के बाद राजभवन ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की। जांच समिति की रिपोर्ट में प्रक्रियागत कमियों और आरक्षण सहित कुछ नियमों के पालन पर प्रश्न उठाए गए बताए गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षा जगत में चर्चाओं का दौर तेज है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि पुराने प्रशासनिक निर्णयों और नियुक्तियों की समीक्षा आगे बढ़ती है तो उसका असर संबंधित मामलों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में राजस्थान यूनिवर्सिटी को लेकर कोई नई आधिकारिक कार्रवाई घोषित नहीं हुई है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना आवश्यक है। वहीं कई शिक्षाविदों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या निर्णय पर अंतिम निष्कर्ष केवल जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

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