लोगों के घरों में आ रहा सीवर मिश्रित पानी : बड़ी संख्या में नमूने फेल, सैलजा ने कहा- सरकार उठाएं प्रभावी कदम

शहर का बड़ा हिस्सा सुरक्षित पेयजल से वंचित

लोगों के घरों में आ रहा सीवर मिश्रित पानी : बड़ी संख्या में नमूने फेल, सैलजा ने कहा- सरकार उठाएं प्रभावी कदम
सैलजा ने जिले में सीवर मिश्रित पेयजल और 295 पानी के नमूनों के फेल होने पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह जनस्वास्थ्य का गंभीर संकट है। जर्जर पाइपलाइनें बदलने, आरओ परियोजना का ऑडिट, जल गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करने और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की तत्काल व्यवस्था की मांग की।

सिरसा। हरियाणा में सिरसा सीट से सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि जिले में दूषित पेयजल की लगातार मिल रहीं शिकायतें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोगों के घरों तक सीवर मिश्रित पानी पहुंच रहा है और बड़ी संख्या में पानी के नमूने फेल हो रहे हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। सरकार को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। यहां जारी एक बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सिरसा जिले में 295 बैक्टीरियोलॉजिकल नमूने फेल हुए हैं, जिनमें 183 नमूने अकेले सिरसा शहर के हैं। पिछले एक सप्ताह में दूषित पेयजल और जलापूर्ति से जुड़ी 170 से अधिक शिकायतें दर्ज होना इस बात का संकेत है कि शहर का बड़ा हिस्सा सुरक्षित पेयजल से वंचित है।

उन्होंने कहा कि दूषित पानी से टाइफाइड, हैजा, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार के दौरान लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक आरओ आधारित पेयजल परियोजना शुरू की गई थी, ताकि शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मिल सके। इसके बावजूद यदि आज भी लोगों को दूषित पानी मिल रहा है, तो सरकार को बताना चाहिए कि इतनी बड़ी परियोजना का पूरा लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पाया।

कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि 40 से 60 वर्ष पुरानी पेयजल पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं और उनमें सीवर का पानी मिल रहा है, तो सरकार को चरणबद्ध योजना बनाकर इन्हें तत्काल बदलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था का तकनीकी ऑडिट कराया जाये आरओ परियोजना की स्वतंत्र समीक्षा हो जल गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाये और समस्या के समाधान तक प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार की सबसे बुनियादी जिम्मेदारी भी। यदि लोगों को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है, तो सरकार को राजनीतिक दावों के बजाय जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

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