नीट-पीजी फीस छूट का संकट! सांसद सुप्रिया सुले ने किया निजी मेडिकल कॉलेजों के 'शोषण' पर रोक लगाने का आग्रह, केंद्र को लिखा पत्र
फीस संरचना का मानकीकृत स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी करे
मुंबई। देश में जारी नीट-पीजी काउंसलिंग के बीच निजी मेडिकल कॉलेजों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के मेधावी छात्रों को अनिवार्य फीस छूट देने से कथित इनकार करने के मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर निजी कॉलेजों के इस "आर्थिक शोषण" को रोकने और पात्र उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सांसद सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में उच्च अंक और अच्छी रैंक हासिल करने वाले ईडब्ल्यूएस वर्ग के मेधावी छात्रों को प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी और वैधानिक नियमों के तहत इन मेधावी छात्रों को ट्यूशन फीस में छूट मिलना अनिवार्य है, लेकिन कई निजी शिक्षण संस्थान इन छात्रों को 100 प्रतिशत सामान्य फीस देने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे ईडब्ल्यूएस आरक्षण और फीस राहत का मूल उद्देश्य ही खत्म हो रहा है।
सुप्रिया सुले ने केंद्रीय मंत्रियों से आग्रह किया है कि निजी मेडिकल कॉलेजों को पारदर्शी और बिना किसी देरी के फीस रियायतें लागू करने के कड़े निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने मांग की कि काउंसलिंग दौर आधिकारिक रूप से शुरू होने से पहले ही केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस सीट आवंटन और फीस संरचना का एक मानकीकृत स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी करे, ताकि निजी कॉलेज नियमों के गड़बड़ियों का फायदा न उठा सकें।
उन्होंने 16 अक्टूबर 2025 के उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों में इसका एकसमान क्रियान्वयन न होने के कारण गरीब और जरूरतमंद छात्रों को प्रशासनिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निजी प्रबंधन की मनमानी और वित्तीय रुकावटों के कारण किसी भी योग्य छात्र का डॉक्टर बनने का सपना नहीं टूटना चाहिए।

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