भारत-भूटान रिश्तों को नई मजबूती, जयशंकर पहुंचे पारो; तीन प्रमुख विकास परियोजनाओं का संयुक्त उद्घाटन और शिलान्यास
भारत-भूटान की मजबूत विकास साझेदारी
सिलीगुड़ी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भूटान के विदेश एवं विदेश व्यापार मंत्री डी.एन. ढुंग्येल भारत और भूटान के बीच जारी उच्चस्तरीय संपर्क के तहत गुरुवार को पारो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। डॉ. जयशंकर अपनी यात्रा के दौरान भूटान के राजा से शाही मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री से भी मिलेंगे। डॉ. जयशंकर और भूटान के विदेश मंत्री ल्योनपो डी.एन. ढुंग्येल ने बुधवार को तीन प्रमुख द्विपक्षीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। इन परियोजनाओं से भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विकास साझेदारी संबंधों को और मजबूती मिली है।
थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने गासा में 500 किलोवाट क्षमता वाली लुनाना जलविद्युत परियोजना की आधारशिला रखने, मोंगर में 65 बिस्तरों वाले ग्याल्त्सुएन जेत्सुन पेमा मातृ एवं शिशु अस्पताल का उद्घाटन करने तथा समद्रुप जोंगखार में 80 मीटर लंबे जगन्नाथन पुल का उद्घाटन करने के कार्यक्रम में संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। लुनाना जलविद्युत परियोजना का उद्देश्य भूटान की उन बस्तियों में बिजली पहुंचाना है जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। दूतावास ने इस परियोजना को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग में एक और मील का पत्थर बताया है। यह सहयोग 1967 में थिम्पू के जंगशिना में भूटान के पहले जलविद्युत संयंत्र की स्थापना के समय से चला आ रहा है।
मोंगर में ग्यालत्सुएन जेटसुन पेमा मातृ एवं शिशु अस्पताल 65 बिस्तरों वाली एक अत्याधुनिक विशेष सुविधा है, जिसका उद्देश्य पूर्वी भूटान में गुणवत्तापूर्ण और विशेष मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करना है। भूटान-भारत दोस्ती के तहत 'प्रोजेक्ट दंतक' द्वारा बनाया गया जगनाथन ब्रिज, पूर्वी भूटान में त्राशिगांग और समद्रुप जोंगखर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। ये तीनों परियोजनाऐं मिलकर ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवायें और यातायात के बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी है, जो भारत-भूटान की विकास भागीदारी के व्यापक दायरे को दिखाते हैं।
डॉ. जयशंकर का यह दौरा दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय बातचीत का हिस्सा है और इसका मकसद दोस्ती और सहयोग के पुराने रिश्तों को और मजबूत करना है। खास बात यह है कि डॉ. जयशंकर का यह दौरा दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय बातचीत का हिस्सा है और इसका मकसद भारत और भूटान के बीच दोस्ती और सहयोग के पुराने रिश्तों को और मजबूत करना है।

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