मायावती ने यूपीआई शुल्क पर सरकार को घेरा : जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, कहा- जनकल्याणकारी नीतियों पर अधिक ध्यान दे सरकार
शुल्क लगाने की व्यवस्था से लोगों में बेचैनी
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए यूपीआई शुल्क और उत्तर प्रदेश सरकार की 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय सरकार को जनकल्याणकारी नीतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी अपने बयान में कहा कि यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले बढ़ावा देने के बाद अब उस पर शुल्क लगाने की व्यवस्था से लोगों में बेचैनी और आक्रोश स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था को स्वीकार करने से पहले उसके प्रभाव पर विचार करना चाहिए।
गौरतलब है कि नए प्रावधान के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुङ्क्षनदा कारोबारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाना है और व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले यूपीआई लेनदेन तथा करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन शुल्क से बाहर रहेंगे। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि देश की बड़ी आबादी महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से प्रभावित है। ऐसे में सरकार की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जिनसे आम लोगों को राहत मिले और उनकी आर्थिक परेशानियां कम हों। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 300 करोड़ रुपये की इस योजना के साथ बच्चों को डिजिटल सुविधाएं देने से पहले विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों के सिर पर छत, बैठने के लिए बेंच-कुर्सियां, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी तरह उपलब्ध होनी चाहिए। मायावती ने सरकार से इस पहल पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की मांग की। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके लिए 300 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है और प्रत्येक विद्यालय के लिए करीब 2.07 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। योजना में इंटरनेट कनेक्टिविटी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

Comment List