राजस्थान निकाय चुनाव : मेयर-अध्यक्ष चुनाव से पहले बाड़ेबंदी का सियासी खेल चरम पर, कांग्रेस ने कई जगह पार्षदों को दूसरे राज्यों में भेजा
पुलिस-प्रशासन पर कांग्रेस का आरोप
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों के नतीजों के बाद मेयर, डिप्टी मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में बाड़ेबंदी (पार्षदों को एक जगह सुरक्षित रखने) का खेल तेज हो गया है। कांग्रेस ने कई जगहों पर अपने पार्षदों की सघन निगरानी बढ़ा दी है और कुछ जगहों पर उन्हें दूसरे राज्यों में भी भेजा है। वहीं, बाड़ेबंदी के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रशासन के माध्यम से पार्षदों को परेशान करने की खबरों पर कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाए हैं।
निकाय चुनावों में 10,244 वार्डों के नतीजों के मुताबिक भाजपा 4,182, कांग्रेस 3,619 और निर्दलीय 2,273 सीटें जीती हैं। अधिकांश निकायों में मेयर/सभापति/अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को और डिप्टी पदों का 22 सितंबर को होना है। जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और सुकेत नगरपालिका में यह प्रक्रिया स्थगित होकर 25-26 सितंबर को होगी।
बाड़ेबंदी : कांग्रेस की रणनीति अजमेर नगर निगम
कांग्रेस के 37 पार्षदों (कुछ निर्दलीय सहित) को कर्नाटक (बेंगलुरु) भेजा गया। डीके शिवकुमार के रिसॉर्ट में ठहराया गया। खरीद-फरोख्त का डर।
कई अन्य निकाय (जयपुर, उदयपुर, अलवर, पाली, जालोर आदि)
पार्षदों को होटल-रिसॉर्ट में रखा; कुछ को हिमाचल प्रदेश भी भेजा गया। निगरानी बढ़ाई गई।
सामान्य रणनीति :
वोटिंग से पहले पार्षदों को सुरक्षित रखने और क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए बाड़ेबंदी। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा द्वारा संभावित खरीद-फरोख्त और दबाव से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पुलिस-प्रशासन पर कांग्रेस का आरोप :
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा पुलिस के जरिए पार्षदों (खासकर निर्दलीय) को डरा-धमका रही है, फर्जी मुकदमे थोपने की धमकी दे रही है और उन्हें अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। जोधपुर में निर्दलीय/कांग्रेस समर्थक पार्षदों को जबरन भाजपा के बाड़े में ले जाने का आरोप है। परिवार को बंदी बनाने की शिकायतें भी आईं। कांग्रेस नेताओं ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।

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