किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस : जयपुर में मिलेट एंड मस्टर्ड कॉन्क्लेव में उत्पादकता, प्रसंस्करण और मजबूत मूल्य शृंखला पर मंथन
सरसों-मिलेट की खेती में तकनीक और बाजार का होगा विस्तार
जयपुर। राजस्थान की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शुक्रवार को द ललित जयपुर में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की ओर से आयोजित चौथे राजस्थान मिलेट एंड मस्टर्ड कॉन्क्लेव-2026 में सरसों और मोटे अनाज की उत्पादकता बढ़ाने, प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने, मजबूत मूल्य शृंखला विकसित करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विशेषज्ञों ने मंथन किया।
कार्यक्रम की थीम ‘नवीन तकनीकों से लचीली फसलें’रही। इसमें कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया।
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने कहा कि राजस्थान के कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। बदलती जलवायु और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए आधुनिक तकनीक, बेहतर अनुसंधान और नवाचार को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। सरकार, कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग, स्टार्टअप, किसान उत्पादक संगठनों और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी से उत्पादकता बढ़ाने के साथ कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में राजस्थान खाद्य पार्क विकास नीति-2026 घोषित की गई है और 39 स्थानों की पहचान की जा चुकी है। प्रयास है कि तकनीक का लाभ खेत और किसान तक पहुंचे तथा इसका सीधा असर किसानों की आय पर दिखाई दे।
कृषि आयुक्त सुरभि राणा ने कहा कि कृषि तकनीक का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उसे जमीनी स्तर पर किसानों की जरूरत के अनुरूप लागू किया जाए। राजस्थान में डिजिटल सेवाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों, अनुसंधान और बाजार संपर्क को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।
सरसों पर जारी रिपोर्ट में सामने आया तकनीक का असर :
कॉन्क्लेव में ‘भारत के सरसों क्षेत्र की क्षमता को खोलना : तकनीक, उत्पादकता और किसान समृद्धि’ रिपोर्ट जारी की गई। इसके प्रमुख निष्कर्ष डॉ. हेमा यादव, निदेशक, सीसीएस राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान ने साझा किए।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सरसों क्षेत्र के विकास के अगले चरण में केवल खेती का रकबा बढ़ाने के बजाय उत्पादकता और तकनीक पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अध्ययन में पाया गया कि संकर बीज और आधुनिक कृषि पद्धतियां अपनाने वाले किसानों की आय में अनुमानित 12.9 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि फसल नुकसान में 23 प्रतिशत कमी आई।
रिपोर्ट में कहा गया कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य है और यहां संकर बीज, वैज्ञानिक खेती तथा बेहतर कृषि विस्तार सेवाओं को बड़े स्तर पर अपनाने की संभावनाएं हैं। उत्पादकता बढ़ाने के साथ बेहतर खरीद व्यवस्था, भंडारण, गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण और प्रसंस्करण इकाइयों से मजबूत संपर्क भी जरूरी है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ देश की खाद्य तेल सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
महिला किसानों का सम्मान, बाजरा केक भी काटा :
अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 के अवसर पर कृषि क्षेत्र में योगदान देने वाली महिला किसानों का सम्मान किया गया। इस दौरान महिला किसानों के साथ विशेष बाजरा केक काटने का कार्यक्रम भी हुआ। उद्घाटन सत्र में फिक्की राजस्थान राज्य परिषद के सदस्य एवं अक्षय इंफ्रासिस इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक अक्षय हाड़ा ने स्वागत संबोधन दिया। समापन पर फिक्की राजस्थान राज्य परिषद के निदेशक एवं प्रमुख अतुल शर्मा ने आभार जताया।
सरसों से खाद्य तेल सुरक्षा तक :
पहले सत्र में सरसों की उत्पादकता, अनुसंधान, नवाचार, बेहतर बीज, प्रसंस्करण और बाजार अवसरों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने किसान से लेकर अनुसंधान, उद्योग, प्रसंस्करण और बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत करने की जरूरत बताई। चर्चा में केएम कुमावत, डॉ. भूपेश वैद, डॉ. हेमा यादव, डॉ. मनोज मुरारका और प्रगतिशील किसान हनुमान गुर्जर ने विचार रखे।
कृषि में विविधता और नए बाजारों पर चर्चा :
दूसरे सत्र में राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था में विविधता लाने, नए बाजार विकसित करने तथा कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के अवसरों पर चर्चा हुई। जीजेवी मुरली मोहन और वेद प्रकाश यादव ने कृषि एवं उद्योग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे।
बाजरे को खेत से बाजार तक पहुंचाने पर जोर :
तीसरे सत्र में मिलेट यानी बाजरा सहित मोटे अनाज को उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, संस्थागत खरीद तथा घरेलू और वैश्विक बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने मजबूत मांग, बेहतर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों के लिए नए व्यावसायिक अवसर विकसित करने की आवश्यकता बताई। सत्र में डॉ. सुरेश कुमार यादव, विशालाक्षी वुय्येला, डॉ. तनुश्री सिंह, किसान राजाराम गुर्जर और पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ सहित अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कॉन्क्लेव के समापन पर विशेषज्ञों ने कहा कि राजस्थान की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान, किसानों के अनुभव और बाजार की जरूरतों को एक मंच पर लाना जरूरी है। सरसों और मिलेट जैसी कम पानी में अपेक्षाकृत बेहतर अनुकूलन वाली फसलों में नवाचार, मजबूत मूल्य शृंखला और बेहतर बाजार संपर्क किसानों के लिए नए अवसर तैयार कर सकते हैं।

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