अलवर मेयर चुनाव से पहले सियासी घमासान : भाजपा ने दिखाया 37 का कुनबा, 3 अन्य पार्षद भी साथ होने का दावा

निगम में बहुमत के लिए 33 मत जरूरी

अलवर मेयर चुनाव से पहले सियासी घमासान : भाजपा ने दिखाया 37 का कुनबा, 3 अन्य पार्षद भी साथ होने का दावा
महापौर चुनाव से पहले भाजपा ने 37 समर्थक पार्षदों की फोटो जारी कर 40 का समर्थन होने का दावा किया है। 65 सदस्यीय निगम में बहुमत का आंकड़ा 33 है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के 12-15 पार्षद भितरघात कर सकते हैं। पिछली बार भाजपा के 36 के दावे के बावजूद कांग्रेस को 38 वोट मिले थे। 21 सितंबर को फैसला होगा।

अलवर। राजस्थान में अलवर नगर निगम महापौर चुनाव से एक दिन पहले भाजपा-कांग्रेस के बीच शक्ति प्रदर्शन तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वन मंत्री संजय शर्मा के साथ 37 समर्थक पार्षदों का फोटो जारी करके बहुमत का स्पष्ट संदेश दिया है। भाजपा का दावा है कि 37 पार्षद उनके खेमे में हैं और तीन अन्य पार्षद भी साथ हैं। यानी कुल 40 पार्षदों का समर्थन है। 65 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 33 मत जरूरी हैं।

वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने भाजपा के दावे को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा खेमे में असंतोष है और उसके 12 से 15 पार्षद कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। भाजपा के लिए पिछली बार का घटनाक्रम इस चुनाव में सबसे बड़ा सबक है। पिछले नगर निगम चुनाव में भाजपा के 27, कांग्रेस के 19 और निर्दलीयों के 19 पार्षद जीते थे। सभापति चुनाव से पहले भाजपा ने 36 पार्षदों के समर्थन का दावा किया था, लेकिन मतदान में कांग्रेस के पक्ष में 38 वोट पड़े और भाजपा को 27 मत ही मिले। इस बार भाजपा पिछली स्थिति दोहराने से बचने के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी से लेकर मतदान के दिन तक जोरदार प्रबंधन पर जोर दे रही है। चुनावी प्रबंधन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की भूमिका अहम मानी जा रही है। भाजपा जहां 40 के आंकड़े के साथ बहुमत का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस भाजपा के भीतर संभावित भितरघात के भरोसे समीकरण पलटने की रणनीति पर काम कर रही है।

महापौर चुनाव के लिए 21 सितंबर को भाजपा और कांग्रेस के पार्षद सीधे नगर निगम पहुंचेंगे और मतदान के बाद फिर अपने-अपने खेमे में लौटेंगे। अगले दिन 22 सितंबर को उप महापौर के चुनाव के लिए दोबारा नगर निगम पहुंचकर मतदान करेंगे। ऐसे में दोनों दलों के लिए चुनौती सिर्फ महापौर का चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि मतदान तक अपने पार्षदों को एकजुट रखने की भी है। भाजपा के 40 पार्षदों के दावे और कांग्रेस के भितरघात के दावे के बीच अब असली फैसला 21  सितंबर को मतपेटी में होगा।

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