राजस्थान में रोबोटिक सर्जरी का नया रिकॉर्ड, जयपुर के CK बिरला हॉस्पिटल ने पूरी की 700 सफल सर्जरी

कई जटिल ऑपरेशन में मिली सफलता

राजस्थान में रोबोटिक सर्जरी का नया रिकॉर्ड, जयपुर के CK बिरला हॉस्पिटल ने पूरी की 700 सफल सर्जरी
सीके बिरला हॉस्पिटल्स (आरबीएच), जयपुर 700 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी सफलता पूर्वक करने वाला राजस्थान का पहला प्राइवेट हॉस्पिटल बन गया है। दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी और जनरल सर्जरी के जटिल ऑपरेशनों को मिनिमली इन्वेसिव तकनीक से अंजाम दिया गया है।

जयपुर। सीके बिरला हॉस्पिटल्स, (रुकमणि बिरला हॉस्पिटल), जयपुर राजस्थान में 700 रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी करने वाला पहला प्राईवेट हॉस्पिटल बन गया है। यह उपलब्धि हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी, ऑन्को-गायनेकोलॉजी, यूरोलॉजी और गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल सर्जरी में पाँच प्रशिक्षित सर्जनों के साथ मल्टीडिसिप्लिनरी रोबोटिक सर्जरी टीम की मदद से मिली है, जिसमें डॉ. देवेंद्र शर्मा, डायरेक्टर, यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, डॉ. सी.पी दधीच, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी और डॉ. राजेश शर्मा, डायरेक्टर, जनरल सर्जरी, मिनिमल एक्सेस और बेरियाट्रिक सर्जरी शामिल हैं।

इस हॉस्पिटल में अलग-अलग स्पेशियलिटीज में दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की जाती है, जिसमें किडनी कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, गायनेकोलॉजिकल कैंसर, एंड-स्टेज रीनल डिजीज और कॉम्प्लेक्स एब्डॉमिनल वॉल डिसऑर्डर जैसी कई समस्याओं के लिए मिनिमली इन्वेजिव सर्जरी शामिल है। पिछले सालों में इस सिस्टम का काफी विकास हुआ है और इसकी मदद से जटिल से जटिल मामलों को संभालना भी संभव हुआ है। इस सिस्टम ने राजस्थान और पड़ोसी क्षेत्रों के मरीजों के लिए आधुनिक सर्जिकल केयर की उपलब्धता बढ़ाई है। 

रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के बढ़ते उपयोग के बारे में डॉ. सी.पी दधीच, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी जटिल ऑपरेशन करने का तरीका बदल रही है। अब अलग-अलग स्पेशियलिटीज में सर्जन को बेहतर विज्युअलाईजेशन, प्रेसिजन और कंट्रोल मिलता है। गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में इसने जटिल समस्याओं के लिए मिनिमिली इन्वेजिव सर्जरी का विस्तार किया है, जिससे मरीजों को ज्यादा तेज रिकवरी और बेहतर नतीजे प्राप्त करने में मदद मिली है। 700 रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी पूरी होने से आधुनिक सर्जिकल टेक्नोलॉजी और बेहतर नतीजे देने की इसकी क्षमता में क्लिनिशियन और मरीजों का बढ़ता विश्वास प्रदर्शित होता है। 

यह उपलब्धि विभिन्न स्पेशियलिटीज, जैसे गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांटेशन और एडवांस्ड एब्डॉमिनल वॉल रिकॉन्सट्रक्शन में रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी का योगदान प्रदर्शित करती है। हाल ही में हॉस्पिटल ने राजस्थान का पहला रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट और बायोरिजॉर्बेबल मेश की मदद से पहला रोबोटिक असिस्टेड ईटीईपी-आरएस (एक्सटेंडेड टोटली एक्स्ट्रापेरिटोनियल रेट्रोमस्कुलर सबले) हर्निया रिपेयर करके इस प्रोग्राम की बढ़ती क्लिनिकल क्षमताओं को उजागर किया है।

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रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट एक 33 साल के मरीज का किया गया, जिन्हें एडवांस्ड किडनी डिजीज थी, जिसके कारण उन्हें नियमित तौर से हेमोडायलिसिस कराना पड़ता था। उन्हें उनकी माँ ने अपनी किडनी दी। डोनर किडनी की एनाटोमिकल बनावट काफी मुश्किल थी, जिसमें कई सारी नसें और यूरेटर शामिल थे। इसलिए ट्रांसप्लांट के लिए बहुत सतर्क योजना और सर्जिकल प्रेसिजन की जरूरत थी। यह सर्जरी एक छोटा सा चीरा लगाकर बहुत सटीकता से की गई। मरीज के शरीर में ग्राफ्ट ने बहुत जल्दी काम करना शुरू कर दिया और उन्हें पाँच दिनों में ही हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।

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डॉ. देवेंद्र शर्मा, डायरेक्टर - यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘किडनी ट्रांसप्लांट के हर मामले की अलग क्लिनिकल चुनौतियाँ होती हैं। इसलिए सबसे बेहतर नतीजे पाने के लिए सर्जरी का सबसे सही दृष्टिकोण चुनना बहुत जरूरी होता है। इस मरीज के मामले में डोनर किडनी की एनाटोमी में अंतर था। इसलिए बहुत सतर्क योजना और प्रेसिजन रखना बहुत जरूरी था। रोबोटिक प्लेटफॉर्म ने इस मुश्किल ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी एक्युरेसी प्रदान की, जिससे मिनिमली इन्वेजिव प्रक्रिया संभव हो सकी। इस मामले से प्रदर्शित होता है कि मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के सहयोग और एडवांस्ड सर्जिकल क्षमताओं द्वारा स्पेशियलाईज्ड ट्रांसप्लांट केयर की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।’’

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एक दूसरे मामले में सर्जिकल टीम ने राजस्थान का पहला रोबोटिक असिस्टेड ईटीईपी-आरएस हर्निया रिपेयर किया, जिसमें मरीज की एब्डॉमिनल वॉल के एक बड़े हिस्से के कमजोर हो जाने के कारण एक बायोरिजॉर्बेबल मेश का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके की मदद से सर्जन बड़ा चीरा लगाए बिना ही एब्डॉमिनल वॉल को रिकॉन्स्ट्रक्ट करने और हर्निया रिपेयर करने में समर्थ बने। ऑपरेशन के बाद मरीज को बहुत कम दर्द हुआ और उन्होंने अच्छी रिकवरी की। सर्जरी के बाद 38 घंटों में ही उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।

डॉ. राजेश शर्मा, डायरेक्टर, जनरल सर्जरी, मिनिमल एक्सेस एवं बेरियाट्रिक सर्जरी, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘एब्डॉमिनल वॉल का बड़ा हिस्सा कमजोर होने पर केवल साधारण हर्निया रिपेयर काफी नहीं होता है। इस तरह के मामलों में हमारा उद्देश्य मरीजों पर सर्जरी का कम से कम प्रभाव डाले बिना उन्हें शक्ति, कार्यक्षमता और लंबे समय तक स्वास्थ्य प्रदान करना होता है। ईटीईपी-आरएस तकनीक एब्डॉमिनल वॉल का एनाटोमिकल रिकॉन्स्ट्रक्शन और ऑप्टिमल मेश प्लेसमेंट संभव बनाती है, जिससे बेहतर नतीजे प्राप्त करने में मदद मिलती है। मरीजों में बायोरिजॉर्बेबल मेश के इस्तेमाल से व्यक्तिगत सर्जिकल केयर में सुधार होता है।’’

अर्पित जैन, यूनिट हेड, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘700 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी पूरी होने से हमारी टीमों द्वारा विभिन्न स्पेशियलिटीज में सालों की मेहनत से हासिल की गई क्लिनिकल विशेषज्ञता, सहयोग और प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है। इससे राजस्थान में एडवांस्ड सर्जिकल केयर की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे मरीजों को उनके घर के नजदीक ही स्पेशियलाईज्ड ट्रीटमेंट मिल पाया है। हम अपनी क्षमताओं को मजबूत बनाने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं कि बेहतर सर्जिकल नतीजों और रिकवरी का लाभ ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँचे।’’रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी का जैसे-जैसे विकास हो रहा है, वैसे-वैसे सीके बिरला हॉस्पिटल क्लिनिकल विशेषज्ञता बढ़ाने, सर्जन के प्रशिक्षण में निवेश करने और मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि एडवांस्ड मिनिमली इन्वेजिव केयर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँच सके।

 

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