जिस आंचल ने दिया था छांव का सुकून, उसी ने उजाड़ दी सांझ: जयपुर में पोते ने की बुजुर्ग दादी की निर्मम हत्या
जयपुर में कलयुगी पोते का खौफनाक कदम
जयपुर। जिस हाथों ने कभी उसे चलना सिखाया होगा, जिस गोद में सिर रखकर उसने बचपन के अनगिनत सपने बुने होंगे, कौन जानता था कि वही हाथ और वही गोद एक दिन खूनी खंजर के साये में दम तोड़ देंगे। जयपुर के भट्टा बस्ती इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों के हर उस पवित्र धागे को तार-तार कर दिया है जिस पर इंसानियत भरोसा करती है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के उस साधारण से घर में मंगलवार का दिन एक कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। 25 साल का कॉलेज छात्र पुलकित, जिसके भविष्य को संवारने के लिए माता-पिता दिन-रात सरकारी स्कूल में पसीना बहा रहे थे, उसी ने अपनी 80 साल की बुजुर्ग दादी विमला देवी की जिंदगी का सूरज हमेशा के लिए बुझा दिया।
खून से सनी चादर और खामोशियां घटना के वक्त घर में कोई और नहीं था—सिर्फ ममता की मूरत बूढ़ी दादी और उनका अपना ही खून, उनका पोता। जब स्कूल से थके-हारे लौटे बेटे प्रदीप शर्मा ने घर का दरवाजा खोला, तो सामने का मंजर देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां विमला देवी का शरीर खून से लथपथ बेड पर बेजान पड़ा था, और उनका गला रेत दिया गया था। सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात तो यह थी कि जिस पोते ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था, वह किसी डर या पछतावे के बिना खून से सने कपड़ों और हाथों के साथ घर के पोर्च में शांत घूम रहा था। जब पड़ोसी श्रवण सिंह अंदर पहुंचे, तो उनके सामने सिर्फ एक बुजुर्ग महिला का शव नहीं था, बल्कि विश्वास और आत्मीयता के टूटने की वह चीख थी जिसे कोई शब्द बयां नहीं कर सकता।
खून से सने हाथ और बेबस मां-बाप एक तरफ कांवटिया अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर बिलखते परिजन हैं, तो दूसरी तरफ वे माता-पिता जो समझ ही नहीं पा रहे कि उनके घर की किस नजर ने इस आंगन को सूना कर दिया। समाज में बच्चों को पढ़ाने-लिखाने वाले शिक्षक माता-पिता आज अपने ही बेटे के इस खूनी रूप के सामने बेबस और लाचार खड़े हैं। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और पूछताछ जारी है—लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई वजह, कोई तनाव या कोई जिद इतनी बड़ी हो सकती है कि जिंदगी की अंतिम सांसे गिन रही उस बुजुर्ग दादी से जीने का हक छीन लिया जाए? यह घटना सिर्फ एक कत्ल नहीं, बल्कि उस भरोसे का कत्ल है जो बुढ़ापे में हर बुजुर्ग की आखिरी लाठी होता है।

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