महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल! मनोज जरांगे ने 31 मिनट की ऑडियो क्लिप सुनाकर साजिश का लगाया आरोप
अगले दो महीनों में बड़े खुलासे करने की दी चेतावनी
छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने सत्ताधारी खेमे पर आरोप लगाया है कि राजनीतिक रणनीतिकारों और नेताओं ने मराठा आरक्षण आंदोलन को कुचलने, उन्हें बदनाम करने और समुदाय के भीतर फूट डालने के लिए तीन साल से साजिश रची है। उन्होंने दावा किया कि एक ऑनलाइन बैेठक की ऑडियो रिकॉर्डिंग से उनके खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की कोशिशों का पर्दाफाश होता है। पाटिल ने एक संवाददाता सम्मेलन करते हुए 31 मिनट से अधिक लंबी एक ऑडियो क्लिप सुनाई। उन्होंने दावा किया कि इसमें राजनीतिक रणनीतिकारों, मीडिया सलाहकारों और नेताओं के बीच उनके आंदोलन का मुकाबला करने के तरीकों पर चर्चा हो रही थी। इस रिकॉर्डिंग में उनके विरोध में खड़े मराठा युवाओं को धन देने, प्रदर्शनों और वाहनों के लिए पैसे मुहैया कराने और उन्हें बदनाम करने के लिए नैरेटिव (कहानियां) फैलाने की बात कही गई है।
उन्होंने इस दावे पर भी सवाल उठाए कि श्रीकांत शिंदे ने उन्हें 500 करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने इस आरोप को अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया। पाटिल ने दावा किया कि ऑडियो से पता चलता है कि समुदाय के भीतर उनके प्रभाव को कम करने के लिए उदययनराजे भोसले और नरेंद्र पाटिल जैसे मराठा नेताओं को मैदान में उतारने पर चर्चा हुई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवादित राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा और सोशल मीडिया नैरेटिव को अपने हिसाब से मोड़ने की रणनीतियों पर बात की गई थी। कार्यकर्ता ने दावा किया कि इन चर्चाओं में जनता का ध्यान अहम मुद्दों से भटकाने की कोशिशें भी शामिल थीं। इसमें सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर दूसरी जगहों की घटनाओं को उछालना और विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे को निशाना बनाना शामिल था।
पाटिल ने जांच की मांग करते हुए वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं से इन आरोपों की जांच करने और यह पता लगाने को कहा कि उनके खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान के पीछे कौन है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें बदनाम करने और आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें जारी रहीं, तो वे अगले एक-दो महीनों में और भी बड़े खुलासे करेंगे। उन्होंने इन संभावित खुलासों को एक मेगा-बम करार दिया और दावा किया कि इससे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक बहस लगातार जारी है। ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता और संदर्भ तथा पाटिल द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

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