फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट से 12 करोड़ की ठगी ,असम का आरोपी विशाखापट्टनम से गिरफ्तार
फर्जी क्यूआर कोड से व्हाट्सएप अकाउंट पर कब्जा
जयपुर । फर्जी ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट के जरिए 12.09 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर ठगी के मामले में राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने असम निवासी बेशराज थापा उर्फ राहुल को विशाखापट्टनम आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया है। मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। एडीजी साइबर क्राइम वी के सिंह ने बताया कि परिवादी को 25 सितंबर 2025 को वॉट्सऐप पर वेबसाइट का लिंक भेजा गया था। वेबसाइट पर गोल्ड ट्रेडिंग में आकर्षक रिटर्न का लालच दिया। परिवादी ने निवेश शुरू किया और 7 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 के बीच करीब छह करोड़ रुपए विभिन्न बैंक खातों में जमा कराए। वेबसाइट के वर्चुअल वॉलेट में 9.42 करोड़ रुपए का लाभ सहित बैलेंस दिखाकर भरोसा दिलाया। रकम निकालने का प्रयास करने पर आरोपियों ने इनकम टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर अतिरिक्त पैसे जमा करवाए। इस तरह परिवादी से कुल 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपए की ठगी की। मामले में वॉट्सऐप-टेलीग्राम रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और बैंक लेन-देन की जांच जारी है।
फर्जी क्यूआर कोड से व्हाट्सएप अकाउंट पर कब्जा परिचितों से इमरजेंसी के नाम पर मांग रहे पैसे ।राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी, अनजान डिवाइस लिंक होते ही संपर्कों तक पहुंच जाते हैं साइबर ठग साइबर ठग अब फर्जी क्यूआर कोड, ओटीपी और संदिग्ध लिंक के जरिए लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट पर कब्जा कर रहे हैं। अकाउंट हैक करने के बाद ठग संपर्क सूची में शामिल परिचितों को इलाज और इमरजेंसी का हवाला देकर पैसे मांगते हैं। इस नए साइबर फर्जीवाड़े को लेकर राजस्थान पुलिस की आरफॉरसी साइबर क्राइम शाखा ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि ठग सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी क्यूआर कोड और वेरिफिकेशन कोड हासिल करने जैसे तरीकों से अकाउंट में सेंध लगाते हैं। कई बार वे दोस्त, अधिकारी या कस्टमर सपोर्ट कर्मचारी बनकर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिन भी मांगते हैं। संदिग्ध ऐप, रिमोट-एक्सेस और स्क्रीन-शेयरिंग के जरिए भी मोबाइल पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जाती है। अनजान डिवाइस दिखे तो रहें सतर्क व्हाट्सएप के लिंक्ड डिवाइसेस में अनजान डिवाइस दिखाई देना, बिना जानकारी संदेश भेजे जाना, अनचाहे ओटीपी आना या अचानक अकाउंट से लॉगआउट होना खतरे के संकेत हैं। पुलिस ने अनजान क्यूआर कोड स्कैन नहीं करने, टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखने और रिकवरी ईमेल जोड़ने की सलाह दी है।

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