एसएमएस में फैंकोनी एनीमिया के मरीज का पहला HLA-मिसमैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल
बोन मैरो ट्रांसप्लांट इस बीमारी में संभावित उपचारात्मक
जयपुर । एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग ने फैंकोनी एनीमिया से पीड़ित 22 वर्षीय मरीज का पहला HLA-मिसमैच्ड एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना के तहत हुए इस प्रत्यारोपण के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और गुरुवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। फैंकोनी एनीमिया एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें बोन मैरो धीरे-धीरे रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने में विफल हो सकता है। इसके चलते मरीज को बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट इस बीमारी में संभावित उपचारात्मक विकल्प है।
इस बीमारी में मरीज की कीमोथेरेपी और रेडिएशन के प्रति संवेदनशीलता अधिक होने के कारण प्रत्यारोपण चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं, HLA-मिसमैच्ड डोनर से ट्रांसप्लांट में संक्रमण और ग्राफ्ट-वर्सेस-होस्ट डिजीज जैसी जटिलताओं का जोखिम भी रहता है। ऐसे में विशेष उपचार योजना और निगरानी जरूरी होती है। यह प्रक्रिया विभागाध्यक्ष डॉ. विष्णु शर्मा के नेतृत्व में की गई। इसमें डॉ. देवेश पराशर सहित प्रत्यारोपण टीम, नर्सिंग स्टाफ और सहयोगी विभागों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मरीज में सफलतापूर्वक नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण शुरू हो चुका है। यह उपलब्धि प्रदेश में उन्नत बोन मैरो ट्रांसप्लांट सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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