विकास के दावों की हकीकत : शहर के बीच बसे गांव जैसे हालात, मूलभूत सुविधाओं को तरसे वार्डवासी
उद्योग नगर-डीसीएम में अपराध और रायपुरा में बदहाल सड़कें बनी चिंता
कोटा। शहर के विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच रविवार को छह वार्डों के किए गए ग्राउंड ऑडिट में कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। शहर का हिस्सा होने के बावजूद कुछ इलाके ऐसे नजर आए, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो शहर के बीचों-बीच कोई गांव बस गया हो। कहीं टूटी सड़कें हैं तो कहीं बदहाल नालियां, कहीं टूटे स्पीड ब्रेकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों के खेलने के लिए पार्क तक उपलब्ध नहीं हैं। कई इलाकों में सामुदायिक भवन जैसी सुविधा भी नहीं है, जहां स्थानीय लोग छोटे-मोटे सामाजिक और पारिवारिक आयोजन कर सकें। छह वार्डों के इस ऑडिट में सामने आया कि विकास की रफ्तार हर क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच पाई है। उद्योग नगर, डीसीएम और हनुमत खेड़ाख, रायपुरा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याएं जरूर हैं, लेकिन आम नागरिकों की मांग एक ही है—सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं हर वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए।
शहर में रहते हुए भी ग्रामीण जैसी सुविधाओं का अभाव
वार्डवासियों का कहना है कि शहर के बीच रहने के बावजूद उन्हें कई ऐसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो एक विकसित वार्ड की पहचान मानी जाती हैं। कई स्थानों पर सड़कें जर्जर हैं और लंबे समय से मरम्मत की मांग की जा रही है। बरसात और समय के साथ सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। रायपुरा के लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहन चलाना मुश्किल होता है, वहीं पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्राउंड ऑडिट के दौरान कुछ क्षेत्रों में ऐसा माहौल दिखाई दिया, जहां विकास की रफ्तार बेहद धीमी नजर आई। वार्डवासियों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायतें करने के बाद भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कई क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित रह जाते हैं।
उद्योग नगर की सड़कें बनीं परेशानी, टूटे ब्रेकर बढ़ा रहे खतरा
उद्योग नगर क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या क्षतिग्रस्त सड़कों और टूटे हुए स्पीड ब्रेकरों को लेकर सामने आई। सड़कों की बदहाली लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। लोगों की मांग है कि सड़क और ब्रेकरों की समय पर मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। उद्योग नगर और डीसीएम क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां समय-समय पर परेशानी का कारण बनती हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वार्डवासियों का कहना है कि सुरक्षित वातावरण भी किसी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल सड़क और भवन निर्माण से ही आदर्श वार्ड नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी मिलना चाहिए।
हनुमत खेड़ा में सुविधाओं की कमी से मायूसी
हनुमत खेड़ा क्षेत्र की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नजर नहीं आई। यहां कई लोगों ने स्थानीय सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पर्याप्त पार्क की सुविधा नहीं होना लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा।
छोटे आयोजनों के लिए भी नहीं मिलती जगह
ऑडिट में एक बड़ी समस्या सामुदायिक भवन के अभाव की भी सामने आई। कई वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में ऐसा कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है, जहां लोग छोटे सामाजिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक आयोजन करवा सकें।
वार्डवासी बोले—पहले मूलभूत सुविधाएं तो मिलें
हम शहर में रहते हैं, लेकिन कई बार सुविधाओं की स्थिति देखकर लगता है जैसे गांव के पिछड़े इलाके में रह रहे हों। सड़कें ठीक नहीं हैं, बच्चों के लिए पार्क नहीं है और कई जगह सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं मिलता। हमारी मांग कोई बड़ी नहीं है, सिर्फ इतनी है कि हर वार्ड में सड़क, बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों।
- जितेन्द्र चौधरी, वार्डवासी
जनप्रतिनिधियों से लोगों को उम्मीद होती है कि वे क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करेंगे। उद्योग नगर और डीसीएम जैसे क्षेत्रों में सड़क और सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता है। यदि आम आदमी को रोजाना टूटी सड़क, खराब सुविधाओं और असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझना पड़े तो विकास के दावों का क्या मतलब रह जाता है।
- दिपू सिंह, वार्डवासी
कार्यकाल में वार्डवासियों की हर समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर कराने का प्रयास किया गया। वार्ड में पार्क जैसी सुविधाओं का अभाव जरूर है, लेकिन जब भी कोई वार्डवासी अपनी समस्या लेकर आता है तो उसका समाधान कराना मेरी पहली प्राथमिकता रहती है। जनसमस्याओं के समाधान के लिए मैं हमेशा तत्पर रहता हू।
- दीपक कुमार, पूर्व पार्षद
वार्ड के कई क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सफाई व्यवस्था नियमित रूप से कराई जाती है, लेकिन कई बार लोग स्वयं कचरा फैला देते हैं। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नालियों के ड्रेनेज व्यवस्था की है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो सका है।
-सुशील त्रिपाठी, पूर्व पार्षद
वार्ड नंबर व क्षेत्र
वार्ड नंबर 29 में वैष्णो कॉलोनी, डालाबाई माताजी , प्रेम नगर द्वितीय आंशिक, मदरसा, सरकारी स्कूल क्षेत्र, राजेंद्र कुशवाहा जागा बस्ती, अफॉर्डेबल आवास योजना के ए, बी, सी, डी और ई, प्रेम नगर तृतीय का आंशिक क्षेत्र तथा गोविंद नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।
वार्ड नंबर 30 : इंदिरा गांधी नगर का आंशिक क्षेत्र, पावर हाउस क्षेत्र, रामदेव मंदिर तथा प्रेम नगर तृतीय क्षेत्र शामिल हैं।
वार्ड नंबर 31 : जलेबी चौक, झिरी के हनुमान जी, विजयलक्ष्मी स्कूल क्षेत्र, तिलक स्कूल, फकीरों का मोहल्ला, भेरूजी का चबूतरा, मस्जिद क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, गुर्जरों का मोहल्ला, नाईस स्कूल के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के पीछे का क्षेत्र, पुलिस चौकी के सामने का क्षेत्र, जागा मोहल्ला और सुभाष स्कूल के पीछे का क्षेत्र शामिल हैं।
वार्ड नंबर 32 : बापू कॉलोनी, कर बाजार, डीसीएम श्मशान, इंदिरा गांधी नगर, तारवाड़ा, पावर हाउस और डीसीएम सेक्टर कार्यालय सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।
वार्ड नंबर 33 : जय श्री विहार, रायपुर नाका, गुलाबबाड़ी, मालीपुरा, लक्ष्मी आवास, थेकड़ा, मॉडल टाउन, रॉयल सनसिटी, कैरियर पॉइंट टाउनशिप, शिवधाम कॉलोनी, कबीरधाम और शिवसागर का क्षेत्र शामिल हैं।
वार्ड नंबर 34 : देवली अरब ग्राम, नया नोहर, राजनगर का आंशिक भाग, महालक्ष्मीपुरम, बक्शी स्कूल, अरिहंत विद्यालय, मित्तल इंटरनेशनल स्कूल, श्याम नगर, हाथीखेड़ा ग्राम, हनुमतखेड़ा ग्राम, श्रीराम कॉलोनी, जगन विहार, गुरु नानक विहार, अरावली विहार, टैगोर नगर, होली फैमिली क्षेत्र, कृष्णा नगर, मोती नगर, गणेश नगर, बृज विहार, देवली अरब रोड, कौटिल्य नगर और प्रताप नगर द्वितीय सहित कई शामिल हैं।

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