राज्य के 3240 निजी मदरसों के शिक्षकों को सरकारी नौकरी देने की तैयारी, 5500 शिक्षा अनुदेशकों के स्थायीकरण की कवायद
शिक्षक निजी मदरसों में ही अध्यापन करेंगे
जोधपुर। मदरसा निजी... प्रबंधन निजी... और शिक्षक भी निजी मदरसे में ही पढ़ाएंगे, लेकिन अब इनकी नौकरी स्थायी यानी सरकारी होगी। राजस्थान में करीब 5500 मदरसा पैरा टीचर्स यानी शिक्षा अनुदेशकों के स्थायीकरण की कवायद के बीच सरकारी सेवा के स्वरूप पर सवाल खड़ा हो गया है। सरकार इन शिक्षकों को वर्षों से मानदेय दे रही है और अब स्थायी करने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। खास बात यह है, कि स्थायीकरण के बाद भी इन्हें सरकारी स्कूलों में लगाने की कोई योजना नहीं है। शिक्षक निजी मदरसों में ही अध्यापन करेंगे। ऐसे में सवाल सीधा है कि करीब 5500 शिक्षक सरकारी कर्मचारी बनेंगे तो उनकी नौकरी की डोर आखिर किसके हाथ में होगी?। राजस्थान में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत मदरसे निजी धार्मिक सोसाइटियों, संस्थाओं या व्यक्तिगत प्रबंधकों के अधीन संचालित होते हैं। यहां काम करने वाले पैरा टीचर्स को सरकार की ओर से मानदेय दिया जाता है, लेकिन उनका कार्यस्थल निजी मदरसा ही रहता है। वे न सरकारी स्कूलों में तैनात हैं और न किसी सरकारी विभाग के सीधे नियंत्रण में। विभिन्न चरणों में नियुक्त इन शिक्षकों को बाद में 2022 के संविदा नियमों के दायरे में शामिल किया गया।
नियमों में 5697 शिक्षक : अक्टूबर 2022 में लागू राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स के तहत करीब 1.10 लाख संविदाकर्मियों को सामाजिक सुरक्षा देने की व्यवस्था की गई थी। इनमें शिक्षा विभाग के 41,423, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के 18,326, अल्पसंख्यक विभाग के करीब 5,697 मदरसा पैरा टीचर्स और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 44,833 कर्मचारी शामिल थे। इन्हें निर्धारित शर्तें पूरी करने पर स्क्रीनिंग के जरिए स्थायी किए जाने का प्रावधान है। अन्य संविदा कर्मी तो सरकारी विभागों में ही कार्यरत है लेकिन मदरसे जो कि निजी संस्थाएं हैं उनमें लगे पैरा टीचर्स को स्थाई करना व्यवस्था का असली पेंच है। शिक्षक निजी मदरसे में ही रहेगा, लेकिन स्थायी सरकारी कर्मचारी होगा। ऐसे में नियुक्ति, नियंत्रण, वेतन, सेवा शर्त और जवाबदेही किसके अधीन होगी? इतना ही नहीं एक सरकारी वेतन भोगी शिक्षक निजी संस्थान में भला कैसे पढा सकेगा?
इनका कहना है : मदरसे निजी संस्थाएं हैं, लेकिन इनके पैरा टीचर्स व शिक्षा अनुदेशकों को सरकार की ओर से मानदेय दिया जा रहा है। अब इन्हें सरकार की ओर से स्थायी करने के प्रयास चल रहे हैं। मदरसे आरटीई के अधीन नहीं आते, इसलिए स्थायी करने के बाद भी स्टाफ को सरकारी स्कूलों में लगाने की कोई योजना नहीं है। मदरसों में ही इन्हें अध्यापन कार्य कराना होगा।
-चेतन चौहान, सचिव, राजस्थान मदरसा बोर्ड

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