ALMM-II की समयसीमा से सौर उद्योग पर संकट के बादल, 15,000 करोड़ निवेश और 15 हजार नौकरियों पर खतरा
नीति के क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की आवश्यकता
जयपुर। आगामी 1 जून से सौर परियोजनाओं में घरेलू सोलर सेल (DCR) आधारित मॉड्यूल के अनिवार्य उपयोग से जुड़ी ALMM-II व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके मद्देनजर देशभर के सौर उद्योग में चिंता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस व्यवस्था को लागू करने से सौर विनिर्माण क्षेत्र को गंभीर झटका लग सकता है। सौर उद्योग ने स्पष्ट किया है कि वह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी सरकारी पहलों का पूर्ण समर्थन करता है, लेकिन घरेलू सोलर सेल निर्माण क्षमता और बाजार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए नीति के क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की आवश्यकता है।
उद्योग जगत के अनुसार, यदि निर्धारित समयसीमा में कोई राहत नहीं दी गई तो देश के 125 से अधिक सोलर मॉड्यूल निर्माता और 500 से अधिक सहायक उद्योग वित्तीय संकट का सामना कर सकते हैं। इससे न केवल उत्पादन गतिविधियां प्रभावित होंगी, बल्कि पूरी सौर आपूर्ति श्रृंखला पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सी ई ओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस स्थिति में करीब ₹15,000 करोड़ का निवेश फंस सकता है, जो आगे चलकर बैंकिंग क्षेत्र के लिए संभावित एनपीए (NPA) का रूप ले सकता है। साथ ही सौर क्षेत्र में 15,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

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