पानी और छांव के लिए यार्डों के चक्कर काट रहा धरती पुत्र

जिंसों की नीलामी भी खुले में हो रही

पानी और छांव के लिए यार्डों के चक्कर काट रहा धरती पुत्र
सुलभ कॉम्प्लेक्स गंदगी से अटे, टोटियां और पाइप गायब, किसान कलेवा योजना में ठंडे पानी की दरकार।

कोटा। एशिया की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी में इन दिनों हाड़ौती सहित विभिन्न क्षेत्रों से किसान जिंस बेचने के लिए आ रहे हैं। लेकिन भीषण गर्मी के चलते किसानों को न तो पर्याप्त मात्रा में छांव मिल पा रही है और न ही पीने के पानी के लिए उन्हें एक यार्ड से दूसरे यार्ड के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण किसान मजबूरन पास की कैंटीन से पानी की बोतलें खरीदकर पी रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।

बूढ़ादीत से मंडी में जिंस बेचने आए किसान श्यामलाल ने बताया, मैं शुक्रवार तड़के ही मंडी आ गया था, लेकिन इतनी भीषण गर्मी में भी दोपहर तीन बजे जाकर मेरा नंबर आया। इस दौरान मैंने प्याऊ से कभी पानी ठंडा आ रहा तो कभी गर्म इस कारण एक-दो बार बोतल खरीदनी पड़ी। दिनभर धूप से बचने के लिए इधर-उधर भटकता रहा और दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे सोकर तथा पेड़ों की छांव में बैठकर अपनी जिंस की रखवाली की।

रामगंजमंडी से आए राजू लाल ने बताया कि प्याऊ में कभी गर्म तो कभी ठंडा पानी आता है। मंडी में छांव वाले स्थान (टीन शेड) बेहद कम हैं। किसान मुकेश ने बताया कि कलेवा योजना में किसानों के लिए ठंडे पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं हैं, एक ड्रम पर कपड़ा बांधकर रखकर हैं। जिससे में भी नाममात्र का गर्म पानी आ रहा हैं। करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाली इस मंडी का आलम यह है कि प्यास बुझाने के लिए किसानों को एक यार्ड से दूसरे यार्ड के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

पर्याप्त मात्रा में प्याऊ और टीनशेड हो 
 देखा जाएं तो मंडी में प्याऊ की संख्या कम होने की वजह से किसानों को एक यार्ड से दूसरे यार्ड में पानी लेने जाना पड़ा रहा हैं। जिसकी वजह से उनको कई बार फसल की सुरक्षा की चिंता रहती हैं। किसान रंगलाल, विजय कुमार, विशाल कुमार ने बताया कि मंडी प्रशासन को चलती -फिरती प्याऊ की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे किसानों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पडेÞ। वहीं किसान विजय कुमार ने बताया कि प्याऊ से नाममात्र का ठंडा पानी आ रहा जिसके चलते मैंने करीब दो से तीन बोतल पानी खरीदकर पिया हैं। जिससे किसानों के जेब पर दोहरी आर्थिक मार पड़ा रही। वहीं जिंसों की नीलामी भी खुले में हो रही जिसके चलते हमे इधर-उधर बैठकर ही धूप में इनकी निगरानी करनी पड़ती हैं। वहीं किसान भवन में किसानों के सोने के लिए बेड लगा रखे, हवा के लिए पंखे लगा रखे हैं, पर भवन में दिन में सन्नाटा पसरा हुआ था।

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सुलभ कॉम्प्लेक्स में गंदगी का अंबार 
भामाशाह मंडी स्थित कॉम्प्लेक्स व टॉयलेट में गंदगी का अंबार लगा हुआ। कॉम्पलेक्स क्रमांक एक में तो शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं, इनके नल से टोटियां गायब हो चुकी है, कुछ गेट क्षतिग्रस्त है, गेट से कुंडी भी गायब हो चुकी हैं। इनके यूरीनल से भी पाइप गायब है साथ ही क्षतिग्रस्त भी हो रहे हैं। इसी से थोड़ी दूरी पर स्थित टॉयलेट भी बदतर स्थिति में हैं। वहीं इसी के पास स्थिति टॉयलेट में पानी डालने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और ना ही गेट लगाएं हुए हैं, कुछ यूरीनल तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

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किसान कलेवा भवन में वाटर कूलर की दरकार 
 किसान कलेवा योजना भवन में यदि देख जाएं तो करीब देखा जाएं तो पचास से सौ किसान प्रतिदिन दो बजे तक खाना खाते हैं। किसानों ने बताया कि यहां पर पानी पीने के लिए एक ड्रम रखा हुआ। जिसमें कपड़ा बांध रखा है। ड्रम भी गंदगी के बीच में रखा हुआ। जिसमें भी पानी नाममात्र का ठंडा है जिसके चलते किसानों को पानी खरीदकर पीना पड़ा रहा हैं।किसान संदीप कुमार ने बताया कि किसान कलेवा का समय अभी 10 से 5 बजे तक उसको बढ़ाया जाना चाहिये।

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ये बोले किसान

धर्मकांटे पर ही हो तुलाई 
 मैं रात को ही घर से रवाना होकर तड़के मंडी पहुंच गया था। दोपहर बाद जिंस बिकी और उसे तुलाने के बाद अब पैसे लेकर घर जाऊंगा। यदि मंडी में ट्रैक्टर-ट्रॉली खाली कराने के बजाय सीधे धर्मकांटे पर ही जिंस की तुलाई हो जाए, तो किसानों का काफी समय बच सकता है।
- महावीर, किसान

प्रतिदिन हो कॉम्प्लेक्स की सफाई
 मैं पहली बार मंडी में अपनी जिंस बेचने आया हूँ। रात को ही ट्रैक्टर लेकर रवाना हुआ था और यहाँ आने के बाद माल खाली करवाया। नीलामी में दोपहर बाद मेरा नंबर आया।पानी लेने के लिए एक यार्ड से दूसरे यार्ड में जाना पड़ता है, जिसके चलते परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। मंडी में पानी के प्याऊ की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और सुलभ कॉम्प्लेक्स की प्रतिदिन सफाई होनी चाहिए।
- रामचरण मीणा, किसान

भाड़े के नुकसान से बचेंगे किसान 
 मंडी में जिंस तुलाई के लिए धर्मकांटा होना बेहद जरूरी है। इससे किसानों को माल खाली नहीं करना पड़ेगा और जल्दी नंबर आने से ट्रैक्टर-ट्रॉली के अतिरिक्त भाड़े की मार से किसान बच सकेंगे। इससे किसानों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
- पप्पू लाल, किसान

तड़के से शाम हो गई 
 मैं मंडी में लहसुन बेचने आया हूँ। रात को ही किराए की ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर रवाना हुआ था। जिंस की नीलामी होने और पैसे मिलने तक शाम हो गई। इस दौरान प्याऊ से कभी गर्म तो कभी ठंडा पानी आया, जिसके कारण मुझे 3-4 बार पानी की बोतल खरीदनी पड़ी। किसान कलेवा योजना में भोजन करने के बाद भी ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए वहाँ भी बोतल खरीदकर ही प्यास बुझानी पड़ी।
- त्रिलोक कुमार, किसान

 मंडी के पुराने कॉम्प्लेक्स की शीघ्र ही मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही तीन नये कॉम्प्लेक्टस बनाने के लिए बजट बनाने व मरम्मत के लिए बजट का आवंटन हो चुका हैं। और जो भी समस्या है उनका निराकरण किया जाएगा।
-मनोज कुमार मीणा, सचिव भामाशाह मंडी 

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