असर खबर का : जैविक उत्पाद परीक्षण लैब तैयार, जांच के लिए खत्म होगा इंतजार, समय और खर्च दोनो की होगी बचत
हाड़ौती के किसानों को जल्द मिलेगी सुविधा
कोटा । जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को वैज्ञानिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कोटा जिले को जल्द बड़ी सौगात मिलने वाली है। रावतभाटा रोड पर बनाई जा रही जैविक उत्पाद परीक्षण प्रयोगशाला (ऑर्गेनिक प्रोडक्ट टेस्टिंग लैब) का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। भवन लगभग तैयार हो चुका है और अब इसमें आवश्यक आधुनिक उपकरण व अन्य संसाधन स्थापित किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला शुरू होने के बाद किसानों को अपने जैविक उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए बाहरी राज्यों की प्रयोगशालाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अभी तक कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ सहित हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को जैविक उत्पादों के नमूनों की जांच के लिए दूरदराज की प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे रिपोर्ट मिलने में कई दिन या कई बार सप्ताह लग जाते थे। नई प्रयोगशाला शुरू होने के बाद जांच प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी होगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
जैविक उत्पादों की बढ़ेगी विश्वसनीयता
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रयोगशाला में अनाज, दालें, मसाले, फल, सब्जियां और अन्य जैविक उत्पादों के नमूनों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। यहां उत्पादों की गुणवत्ता, निर्धारित जैविक मानकों का पालन, रासायनिक अवशेषों की स्थिति सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए जाएंगे। इससे किसानों को अपने उत्पादों की प्रमाणिकता साबित करने में आसानी होगी और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर परीक्षण सुविधा उपलब्ध होने से जिले में जैविक खेती को नया प्रोत्साहन मिलेगा। अधिक किसान जैविक उत्पादन की ओर आकर्षित होंगे और उन्हें प्रमाणन की प्रक्रिया में भी सुविधा मिलेगी। इससे हाड़ौती क्षेत्र के जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
इधर एग्री क्लिनिक भी बनेगा मददगार
इसके अलावा अब जिला मुख्यालय में एग्री क्लीनिक की स्थापना की गई है। इस एग्री क्लीनिक के माध्यम से किसानों की फसल संबंधी परेशानियों और शंकाओं का आसान समाधान हो सकेगा। यहां परीक्षण सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। एग्री क्लीनिक तबेला हाउस परिसर में शुरू किया गया है। यहां आवश्यक संसाधन, परीक्षण की व्यवस्थाएं एवं स्टाफ की उपलब्धता भी कर दी गई है। वर्ष 2024 -25 की बजट घोषणा अंतर्गत यह एग्री क्लीनिक स्थापित किया गया है। यहां किसान फसल में कीट आदि के प्रकोप या पोषण की समस्या के लिए आ सकते हैं। मिट्टी में भी किसी प्रकार की समस्या है तो एग्री क्लीनिक पर परामर्श लिया जा सकता है। इसके लिए पौधे अथवा मिट्टी के सजीव नमूने लाकर यहां निशुल्क जांच कराई जा सकती है। यह सुविधा निशुल्क प्रदान की जाएगी।
नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला
जैविक उत्पादों की जांच के लिए हाड़ौती क्षेत्र में प्रयोगशाला नहीं होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 25 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार किया गया था। इसमें बताया था कि सरकार एक ओर तो जैविक खेती को प्रोत्साहन देने का दावा करती है वहीं दूसरी ओर इसके लिए संसाधन नहीं बढ़ा रही है। यहां जैविक खेती के नमूनों की जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं होने से नमूनों को राजस्थान से बाहर भेजना पड़ता है। इससे किसानों को जांच परिणाम के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। यहीं कारण है कि सरकार की ओर से जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के बाद भी काश्तकार इससे नहीं जुड़ पा रहे हैं।
जिले में जैविक उत्पाद परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। यहां रावतभाटा रोड पर यह लैब तैयार की गई है जिसमें शीघ्र ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और कार्य शुरू किया जाएगा।
-अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार

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