मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा
तैयरिया अधूरी: कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी, कही गड्ढों ने बिगाड़ी राह
कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा
मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।
ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार
शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।
खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा
सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।
बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं
गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”
-राहुल शर्मा, वाहन चालक
बारिश का इंतजार क्यों?
मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।
-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी
बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा

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