होम्योपेथी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आयोजित, राज्यपाल ने कहा- चिकित्सा की महान ज्ञान परंपरा का केंद्र रहा है भारत
विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं
जयपुर। होम्योपैथी विश्वविद्यालय, जयपुर के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारत प्राचीन काल से चिकित्सा और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। उन्होंने होम्योपैथी को प्रभावी चिकित्सा पद्धति बताते हुए युवा चिकित्सकों से अनुसंधान, नैतिकता और ईमानदारी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने का आह्वान किया। बिड़ला सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने कहा कि भारतीय चिकित्सा परंपरा को कमजोर करने के लिए अंग्रेजों ने अपनी शिक्षा व्यवस्था लागू की, लेकिन आज आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक पद्धतियां विश्वभर में सम्मान प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रोगी को जिस चिकित्सा से लाभ मिले, उसे अपनाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष पद्धतियां केवल रोगों का उपचार ही नहीं करतीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का मार्ग भी दिखाती हैं। उन्होंने युवाओं से अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए विकसित भारत के लिए स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान देने आहवान किया। समारोह में विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं पूर्व सांसद डॉ. मनोज राजोरिया तथा राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने विश्वविद्यालय की स्थापना और होम्योपैथी के विकास पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं तथा चिकित्सा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।

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