असर खबर का : नहरों में बढ़ाया जलप्रवाह, मुरझाई फसलों को मिलेगी संजीवनी

लोकसभा अध्यक्ष बिरला की पहल पर छोड़ा सिंचाई का पानी

असर खबर का  :  नहरों में बढ़ाया जलप्रवाह, मुरझाई फसलों को मिलेगी संजीवनी
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद हुआ निर्णय।

कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा, बून्दी और बारां के किसानों को बड़ी राहत मिली है। खरीफ फसलों के लिए नहरी पानी की कमी को देखते हुए बिरला ने एक बार फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की। इसके बाद गांधी सागर बांध से अतिरिक्त 2000 क्यूसेक तथा राणा प्रताप सागर बांध से 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहरों में छोड़ने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में नहरों में 2000 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है, जो इस निर्णय के बाद बढ़कर 5000 क्यूसेक हो जाएगा। महज दस दिनों में यह दूसरी बार है, जब बिरला की पहल पर मध्यप्रदेश सरकार ने गांधी सागर बांध से सीधे कोटा-बून्दी क्षेत्र के किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस वर्ष कमजोर मानसून के कारण राणा प्रताप सागर बांध का जलस्तर सामान्य से कम रहने से नहरों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। इस निर्णय के बाद क्षेत्र की नहरों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे खरीफ फसलों को समय पर सिंचाई मिल पाएगी।

दायीं में 1500 व बायीं नहर में 1300 क्यूसेक जलप्रवाह
जिला प्रशासन के निर्देश पर सीएडी विभाग ने सोमवार देर शाम को बायीं नहर में 1300 क्यूसेक और दायीं नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। तात्कालिक राहत के रूप में राणा प्रताप सागर बांध से सोमवार को 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी भी छोड़ा गया है। आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होने और राणा प्रताप सागर का जलस्तर बढ़ने पर नहरों में और अधिक पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भी सोमवार को क्षेत्रीय विकास आयुक्त सीएडी अनिल कुमार अग्रवाल को शीघ्र गांधी सागर बांध से अतिरिक्त 2000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उल्लेखनीय है कि 10 जुलाई को किसानों ने बिरला से मुलाकात कर नहरों में पानी की कमी से खरीफ फसलों के प्रभावित होने की चिंता जताई थी। इसके बाद बिरला ने तत्काल संबंधित अधिकारियों और मध्यप्रदेश सरकार से चर्चा कर गांधी सागर बांध से अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। उनकी पहल पर उसी समय 1800 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहरों में छोड़ा गया था।

किसानों की सीएडी अधिकारियों से हुई वार्ता
इधर किसानों के प्रतिनिधिमंडल और संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त सहित सीएडी के अधिकारियों से सोमवार को वार्ता हुई थी। वार्ता के बाद दोनों नहरों में जलप्रवाह बढ़ाने का निर्णय किया गया। युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि इस समय नहरों में पानी बढ़ाया जाना अत्यंत आवश्यक था क्योंकि नहरें पूरी क्षमता से नहीं चलने के कारण किसानों की फसलें सूखने के कगार पर आ गई थी। भूमि का जल स्तर काफी गिरने के कारण ट्यूबवेल हवा फेंक रहे थे। किसान अपनी फसल बचाने के लिए अतिरिक्त खर्चा करने पर विवश था। अब जब नहरें पूरी क्षमता से चलेंगी तो उम्मीद है कि हर किसान को पानी मिलेगा। उन्होंने किसानों से भी आग्रह किया की पानी का सदुपयोग कर सभी किसानों तक पानी पहुंचाने में सहयोग करे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ किसान नेता दशरथ कुमार, किसान नेता बुधराम चौधरी, हरजिंदर सिंह, सूरजमल नागर, रमेश मीणा, गुरबेज सिंह, सुखविंदर सिंह, रमेश मीणा हिंगोनिया, रामगोपाल मीणा, विरक सिंह आदि मौजूद थे।

नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी किसानों की पीड़ा
बारिश के अभाव में खेतों में बीज खराब होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 7 जुलाई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। जून के आखिरी सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह तक अच्छी बारिश की उम्मीद में किसानों ने महंगे दामों पर सोयाबीन का बीज खरीदकर खेतों में बुवाई तो कर दी, लेकिन बादलों की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से कई जगह बीज अंकुरित ही नहीं हो रहा, जबकि जहां अंकुरण हुआ है वहां तेज धूप के कारण नन्हे पौधे सूखने लगे हैं। लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की नमी खत्म हो गई।इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।

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प्रशासन के निर्देश पर दोनों नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ाया गया है। मध्यप्रदेश प्रशासन ने गांधी सागर और राणाप्रताप सागर बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग स्वीकार कर ली है।
-हरेतलाल मीणा, अधीक्षण अभियंता, सीएडी

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