स्टार्टअप स्केलिंग के लिए सिस्टम की पैचिदगियां बड़ी चुनौती, एकल विंडो की जरूरत, आइडिया, टैलेंट, फंड और मजबूत तकनीक जरूरी
हाडौती में स्टार्टअप स्केलिंग के लिए मैन्युफैक्चरिंग में स्टार्टअप की जरूरत
कोटा। स्टार्टअप को स्केल करने के लिए केवल फंडिंग ही पर्याप्त नहीं है। आइडिया, सही टीम, मजबूत तकनीक, प्रभावी प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन अपनाने पर ही स्टार्ट अप हाडौती में सफल हो सकते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना सकते हैं। यह बात उभर कर आई दैनिक नवज्योति की बुधवार को हुई मासिक परिचर्चा में। दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित इस टॉक शो का विषय था हाडौती में स्टार्टअप स्केलअप होने के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं( चैलेंजज इन स्केलिंगअप स्टार्ट अप इन हाडौती) । इस टॉक शो में इंडस्ट्री,व्यापार,नये और पुराने स्टार्टअप के फाउंडर,कोटा व्यापार संघ से जुडे सदस्य,एसएसआई के मैंबर, आई स्टार्ट के मेंटोर,चार्टर एकाउंटेंट, कंपनी सैकेट्री, सरकारी और प्राइवेट एजेसियों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं टॉक शो के उसके अंश-
यह हैं स्टार्टअप स्केलअप के चैलेंज
- स्टार्टअप के विस्तार के लिए पूंजी की कमी
- टैलेंट और कर्मचारियों की कमी
-राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं होता
- तकनीकी प्रणाली मजबूत नहीं होने पर सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती
-मजबूत प्रबंधन टीम बनाने की आवश्यकता
-नकदी प्रवाह का प्रबंधन
-स्ट्रेटीजी तैयार हो, बाजार में बड़ी कंपनियां भी प्रवेश कर सकती हैं
- उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता मेंग्राहक संतुष्टि बनाए रखना बड़ी चुनौती
- टैक्स, डेटा सुरक्षा, श्रम कानून, लाइसेंस और अन्य सरकारी नियमों का पालन बड़ी चुनौती
-सही समय पर, नियंत्रित और टिकाऊ विस्तार
न्यूक्लियर पावर अपॉर्च्युनिटी
हाड़ौती में न्यूक्लियर पावर की प्रचुरता है। इससे संबंधित स्टार्टअप पर फोकस कर उसे शुरू किया जाए तो उसका अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप पूरे देश में अपनी पहचान बना सकते हैं और यहां से विकसित राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। लेकिन अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। साथ ही स्टार्टअप शुरू करने व इन्हें प्रोत्साहित करने के सरकारी नियम तो बने हुए हैं उसमें कई तरह की छूट का प्रावधान भी किया गया है लेकिन उनका वास्तविक रूप में लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि शत प्रतिशत लाभ मिलने लगे तो कोई कारण नहीं हैं कि स्टार्टअप स्केलअप नहीं कर सकें। साथ ही युवाओं को रोजगार व उनकी आय के साधन भी मिलने लगेंगे।
-गोविंद राम मित्तल, फाउंडर प्रेसिडेंट द एसएसआई एसोसिएशन
पूरी रिसर्च से शुरू करें स्टार्टअप
स्टार्टअप शुरू करना किसी बिजनेस से कम नहीं है। इसके लिए पहले पूरी तैयारी करने की जरूरत होती है। किसी भी काम के बारे में पूरी जानकारी करने के बाद ही शुरू करने पर उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सरकार की ओर से स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो अच्छी बनाई गई हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम में कई कमियां हैं जिनके कारण युवा चाहकर भी अपना स्टार्टअप शुरू करने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। चीन में उद्योग बढने का कारण वहां सुुविधाएं अधिक है। जबकि तुलनात्मक रूप से भारत में उद्योग, व्यापार या स्टार्टअप को शुरू करने व आगे बढ़ाने में सुविधाएं बाधक बन जाती हैं।
-अशोक माहेश्वरी ,प्रेसिडंट होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन
स्टार्टअप की स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर
स्टार्टअप को शुरू हुए दस साल हो गए हैं। देशभर में अब तक दो लाख स्टार्टअप हो चुके हैं। हाड़ौती में 560 व कोटा में 490 स्टार्टअप हैं। नवम्बर 2025 के एक ही महीने में एक साथ 150 स्टार्टअप शुरू हुए थे। लेकिन बहुत कम स्टार्टअप ऐसे है जो व्यापक स्तर पर अपनी पहचान बना सके हैं। राजस्थान के दो ही स्टार्टअप देशभर में अपनी पहचान बना पाए हैं। स्टार्टअप स्केल की समस्या स्थानीय स्तर पर ही नहीं है पूरे देश की समस्या है। स्टार्टअप स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर करता है। प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होगी तो उसका मार्केट भी उतना ही बड़ा होगा। स्टार्टअप शुरू करने से पहले उससे संबंधित सभी पहलुओं की तैयारी करनी पड़ती है तभी सफलता संभव है।
-कोस्तुभ भट्टाचार्य, मेंटोर स्टार्टअप कंसलटेंट आई स्टार्ट राजस्थान
स्टार्टअप स्केलअपन में फंड मैनेजमेंट बड़ी समस्या
स्टार्टअप का मतलब ही नए सिरे से किसी व्यवसाय को शुरू करना है। एक बार हिम्मत कर युवा स्टार्टअप शुरू कर भी देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए फंड की आवश्यकता होती है। जबकि फंडिंग ही नहीं होने से युवा अपने स्टार्टअप को आगे नहीं बढ़ा पाते। हालांकि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए कनेक् शन भी होने चाहिए। उन्हें भी फंडिंग व कनेक् शन की समस्या का सामना करना पड़ा था लेकिन देर से ही सही समाधान भी मिला। अब वे गुजरात, मध्य प्रदेश व दिल्ली समेत कई जगह पर अपना काम कर रहे हैं।
-शुभम शर्मा फाउंडर सीबीएस प्लीवर स्टार्टअप
मार्केट की स्वीकार्यता बड़ी चुनौती
कोई भी स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है। लेकिन उसकी मार्केट में एक्सेबिलिटी भी होनी चाहिए। युवाओं द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जा रहा है उसकी मार्केट में डिमांड होगी तो वह ग्रो करेगा वरना परेशानी होती है। हालत यह है कि कई स्टार्टअप इसलिए भी आगे नहीं बढ़ पाते कि उनके द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जाता है उसका प्रमोशन नहीं होने से मार्केट नहीं मिल पाता। आरएनडी भी बड़ी समस्या रहती है। मार्केट के साथ उसका प्रमोशन उतना ही जरूरी है।
-सिद्धार्थ गुप्ता ,ट्रेजरार डिवी. चैम्बर आॅफ कामर्स
बेस्ट टैलेंट की कमी
कोटा में स्टार्टअप तो कई शुरू हो रहे हैं। लेकिन ऐसे स्टार्टअप जो देश में अपनी पहचान बनाएं ऐसा स्टार्टअप शुरू करने के लिए यहां तकनीकी विशेषज्ञ या इंजीनियर ही नहीं है। टेलेंट व काम करने वालों की कमी है। लोग स्टार्टअप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए काम की गम्भीरता व जुनून भी होना चाहिए। बाहर से तकनीकी विशेषज्ञ मंगवाने पर उनकी कीमत अधिक चुकानी पड़ती है। साथ ही महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करने या उनके प्रोडक्ट को मार्केट में पहचान दिलाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है।
-नेहा गुप्ता फाउंडर गेन बुक स्टार्टअप
माकेर्टिंग और प्रमोशन के साथ रिसर्च की जरूरत
स्टार्टअप शुरू करने से पहले जो भी प्रोडक्ट तैयार किया जाए उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रोडक्ट तैयार करने व उसकी माकेर्टिंग और प्रमोशन के लिए फंड की आवश्यकता होती है। लेकिन स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी समस्या ही फंड की रहती है। साथ ही जिस स्तर का स्टार्टअप होना चाहिए उसमें काम करने के लिए उस स्तर का टेलेंट नहीं मिल पाता है। जिससे स्टार्टअप एक सीमित दायरे तक ही रह जाते हैं। कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जिससे युवाओं को रोजगार के साथ ही उनके प्रोडक्ट की डिमांड भी बढ़े।
-सीए सुधांशु उपाध्याय सैकेट्री आईसीएआई
कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बन रही
जिस तरह से कई विभागों में सीएसआर का फंड दिया जाता है। उसी तरह का फंड यदि स्टार्टअप को दिया जाए तो उन्हें आर्थिक सम्बल मिलेगा। स्टार्टअप को फंडिंग के लिए एक सिस्टम बनाने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है लेकिन उसके ग्रो करने में कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बनती हैं। उन सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। स्टार्टअप में प्रोडक्ट उत्पादन पर फोकस किया जाएगा तो अधिक लोगों को रोजगार भी दिया जा सकेगा।
-अमित सिंघल, डायरेक्टर इंडेक्सल इंजीनियरिंग
नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप ग्रो तेजी से करेंगे
समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है। फिर चाहे व कोई प्रोडक्ट हो या शिक्षा का क्षेत्र। शिक्षा के क्षेत्र में भी नए-नए स्टार्टअप शुरू किए जा सकते हैं। लेकिन उनमें मेन पावर के साथ ही एआई का अधिक उपयोग किया जाएगा तो उनकी डिमांड व उपयोगिता अधिक होगी। एआई आधारित प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होने से उस काम को करने वाले अधिक युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप की कोटा व हाड़ौती में ही नहीं पूरे देश में डिमांड रहेगी तो स्टार्टअप ग्रो भी तेजी से करेंगे।
-सुदर्शन माथुर ,डायरेक्टर एलबीएस एजुकेशन ग्रुप
सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए
स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो बनी हुई हैं लेकिन सिस्टम में कई कमियां हैं। माइंड सेट ही नहीं है। जिनके कारण स्टार्टअप शुरू करने वालों को कई परेशाननियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए तो युवाओं को सुविधा होगी और स्टार्टअप अधिक सुगमता से काम कर पाएंगे।
-समीर सूद, सैकेट्री एसएसआई एसोसिएशन
स्टार्टअप पर वर्तमान हालात की मार
देश दुनिया में जो हालात हैं उससे स्टार्टअप भी अछूते नहीं हैं। इन पर असर पड़ रहा है। मार्केट ग्रोथ में 40 फीसदी कमी आई है। मैने नोएड़ा में वर्क किया पर वहां पर काफी कर्मचारी कोटा सहित अन्य जगहों के कर्मचारी मेरे पास काम करते थे। जिसमे कुछ तो इंटर करने के लिए आते थे तो कुछ अपना टैलेंट एक्सप्लोर करने के लिए आते थे।मेरी मैंटलिटी हमेशा से रही है कि मैं कोटा में ही रहकर काम करूं, इसके लिए मेरे प्रयास हमेशा ही रहत ेथे कि अधिक से अधिक पैसा बाहर से लाने की कोशिश करता हूं। अभी युद्ध से सहित अन्य विभिन्न कारणों से स्टार्टअप फील्ड और अन्य फील्ड में करीब 40 प्रतिशत गिरावट र्दज की गई हैं। इसके चलते हमने बड़ी-बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों को अभी रूक रखा हैं।
-सिद्धार्थ वशिष्ठ ,फाउंडर रिपोर्टस एन्ड इनसाइज बिजनस रिसर्चर
पानी बिजली कोचिंग बड़ी संभावनाएं
कोटा में भारी संभावना है। हाड़ौती में पानी, बिजली सहित अन्य व्यवस्था यहां पर हैं। यहां तीन लाख बच्चे आते हैं। इसे टैलेंट में बदलना होगा। यह एक अपॉर्चुनिटी है। कुछ समय पहले हमारी एसोसिएशन ने हाड़ौती में रोजगार और बिजनेस को लेकर क्या संभावना हैं। साथ ही हाड़ौती के लिए क्या कुछ कर सकते हैंं पर गंभीर चर्चा की। रोजगार बढ़े और अधिक से अधिक से लोग लाभांवित हो इसके लिए क्या करना चाहिए। पैरेंटस यहां पर केवल मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज रहे हैं। पर हमे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे बच्चा यहां पर मेडिकल के साथ ही डिजिटल शिक्षा, स्किल डवलपमेंट सहित अन्य फील्ड में भी वहां शिक्षा प्राप्त कर सके। क्यो कि अभी पैरेंटस शहर में बच्चे को डर-डर के यहां पर भेज रहा हैं।
-राजेश गुप्ता , प्रेसिडंट डिवीजनल चैम्बर आॅफ कामर्स
मार्केट और सेल में खुद उतरना पड़ता है
मैंने बिजनेस की शुरूआत पापड़ व मंगोड़ी बनाने सहित अन्य कार्य से की जिसमें घर-घर जाकर पापड़ बेचे। फिर शुरूआत में मेरे साथ एक महिला जुड़ी इस तरीके से मेरे साथ महिलाएं जुड़ती गई। अब करीब मेरे पास 80 महिलाएं काम करती हैं। शुरूआत में बिजनेस में लोन लेने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्राहक भी प्रोडक्ट नहीं खरीदते थे उनको समझना पड़ता था। तब जाकर प्रोडक्ट कि सेल बढ़ी, उसके बाद मैंने लड्डू गोपाल कि पोशाक बनाना शुरू तो उसके बारे में इधर-उधर से जानकारी जुटाई और इस कार्य को आगे बढ़ाया। बहुत सी बार वर्कस को सुविधाएं देने के बाद भी वहां हमारे साथ कार्य नहीं करना चाहता है। तो इस दौरान हमको विभिन्न परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।
- भावना करमचंदानी .बिजनस वुमन
सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित हो
स्टार्टअप के लिए इकोसिस्टम भी तेजी से उभर रहा है। सरकार और विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों से नवाचार को बढ़ावा मिला है। स्टार्टअप्स को बनाए रखने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और उद्योग का एक्सपोजर देना होगा। सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित होना चाहिए, जिससे उन्हें शुरूआती स्तर पर अवसर मिल सके। सरकार को, उद्योग, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ अपनी समस्या साझा करें और स्टार्टअप्स के लिए समाधान प्रस्तुत कर सकें।
- आयुष त्यागी, मेंटोर आई स्टार्टअप राजस्थान
फंड राइजर्स के लिए प्रयास ज़रूरी
मैंने पिछले सालों में करीब तीस हजार लोगों को रोजगार दिया साथ ही कई कंपनियों के साथ हम कार्य करते हैं। इसके तहत एमएसएमई संस्था प्राय सरकारी योजनाओं की विभिन्न सूचनाएं सहित अन्य सूचनाएं उद्योगों को उपलब्ध करती हैं। साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यालय और उद्योगों केबीच संस्था सेतु का काम करती हैं। साथ ही हमारा प्रयास है कि 18-25 वर्ष तक का बच्चा कोटा शहर में रहकर की कार्य करें। साथ ही एमएसएमई के माध्यम से शॉर्ट टैंक से बातचीत करके शहर के उद्योगों को शॉर्ट टैंक से रिवॉर्ड लेकर आ रहे हैं।
-दीपक मेहता , एसएसई एसोसिएशन अध्यक्ष
फंड के लिए विश्वास हासिल करना चुनौती
देखा जाएं तो स्टार्टअप में बेसिकली सबसे ज्यादा समस्या फंडिग की आती है क्योकि एंट्ररप्रेन्योर अभी बिजनेस बिल्ड करना चाहते हैं जिसको लेकर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।साथ ही जो पुरानी कंपनियां है फंडिग के लिए उनको प्राथमिकता मिलती हैं। जो पुराने बिजनेस करने वाले है वहां अपना कार्य का तरीका नहीं बदल पा रहे हैं। स्टार्टअप को फंड्स के लिए जल्द कोई तैयार नहीं होता। इस क्षेत्र में आप उतर रहे हैं तो मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है। टैलेंट और लिक्विट केपिटल पर भी ध्यान देना पड़ेगा।
-दीक्षा दुग्गड़,कंपनी सचिव आईसीएसआई कोटा

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