हाडौती के मंदिरों की विरासत संभालने वाला विभाग खुद बेहाल, भवन की स्थिति जर्जर

बारिश में भीगने की कगार पर ऐतिहासिक रिकॉर्ड

हाडौती के मंदिरों की विरासत संभालने वाला विभाग खुद बेहाल, भवन की स्थिति जर्जर
न रास्ता सुगम, न पार्किंग की जगह देवस्थान कार्यालय पहुंचना फरियादियो के लिए बनी अग्निपरीक्षा।

कोटा। शहर के खाई रोड स्थित देवस्थान विभाग सहायक आयुक्त कार्यालय इन दिनों अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। जिन कंधों पर शहर सहित हाड़ौती अंचल के दर्जनों ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती धार्मिक संपत्तियों, ट्रस्टों और व्यवस्थाओं को सहेजने का जिम्मा है, वही कार्यालय आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खोता नज़र आ रहा है। पुजारियों व फरियादियों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी भारी परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अलावा, कार्यालय तक पहुँचने का रास्ता सुगम न होने के कारण फरियादियों को यहाँ आने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने से यहाँ आने वाले लोगों को अपने वाहन खड़े करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

भवन की स्थिति जर्जर, रिकॉर्ड भीगने की आशंका 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्यालय वर्षों पुराना है और इसकी इमारत दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है। बारिश के दिनों में छत टपकने से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और फाइलें भीगने की नौबत आ जाती है। विभाग के पास रियासतकालीन व ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती जमीनों और जमींदारियों से जुड़े कई संवेदनशील कागजात मौजूद हैं, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में अलमारियों में रखी फाइलें बारिश के समय भीग जाती हैं। नियमित साफ-सफाई न होने से इन फाइलों पर लंबे समय से धूल जमी हुई है, जिससे इन पर दीमक लगने और रिकॉर्ड नष्ट होने की आशंका बनी हुई है।

डर के साए में काम करने को मजबूर 
कार्यालय की इस खस्ताहाल स्थिति का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। जर्जर छत के नीचे बैठकर काम करना कर्मचारियों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। हाड़ौती भर के दूर-दराज़ इलाकों से आने वाले पुजारियों और फरियादी राम कुमार व दिनेश ने बताया, "हम यहाँ मंदिर से संबंधित कार्य के लिए आए हैं, लेकिन कार्यालय की छत के नीचे बैठना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि बारिश में पानी टपकने का डर बना रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और मंदिर प्रतिनिधियों ने मांग की है कि हाड़ौती की इस ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत को बचाने के लिए जर्जर भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए या इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, रियासतकालीन संवेदनशील फाइलों का तत्काल डिजिटलाइजेशन कराया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड भविष्य के लिए सुरक्षित रह सके।

रास्ता सुगम नहीं, पहुँचने में छूट रहे पसीने
देवस्थान विभाग कार्यालय में मंदिर संबंधी आवेदन लेकर बूंदी से आए दिनेश कुमार ने बताया, "बस वाले ने हमें बस स्टैंड पर उतार दिया। इसके बाद यहाँ आने के लिए ऑटो किया, लेकिन ऑटो वाले को भी कार्यालय का रास्ता पता नहीं था। जैसे-तैसे समझाकर लाए, लेकिन कार्यालय पहुँचने वाली सड़क पर घुमावदार घाटी होने के कारण ऑटो को चढ़ाने में काफी परेशानी हुई।"

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वहीं, बारां से फरियाद लेकर आए मोहनलाल ने बताया कि वे लोगों से रास्ता पूछते-पूछते यहाँ पहुँचे। रास्ता इतना घुमावदार और ढलान भरा है कि उन्हें पैदल आने में एक-दो जगह विश्राम करना पड़ा।

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पार्किंग और छाया के लिए स्थान नहीं 
कहने को तो यह कार्यालय हाड़ौती भर के मंदिरों और ट्रस्टों के पंजीकरण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संभालता है, लेकिन इसके बाहर न तो ठीक ढंग से वाहन पार्किंग की जगह उपलब्ध है और न ही फरियादियों के बैठने के लिए छायादार स्थान। इसके चलते भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में यहाँ आने वालों की मुसीबतें और बढ़ जाती हैं।

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इनका कहना है
कार्यालय काफी पुराना व जर्जर अवस्था में है। यहां बैठने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही उचित व्यवस्था। बारिश के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है। कार्यालय एक कोने में स्थित होने के कारण आसानी से मिलता भी नहीं है, जिससे बुजुर्ग लोगों को आने-जाने में भारी असुविधा होती है।
-रौनक आनंद, विहिप मंदिर एवं अर्चक पुरोहित प्रमुख, चित्तौड़ प्रांत

 मैं सांगोद से यहाँ काम के सिलसिले में आया था। बस स्टैंड से पर्सनल ऑटो करके आया, लेकिन रास्ता घुमावदार होने के कारण ऑटो चालक को यहाँ तक आने में काफी परेशानी हुई।
-रामलाल, फरियादी

नया ऑफिस बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा हुआ है। जैसे ही इसकी मंजूरी आएगी, नए भवन का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।"
- के.के. खंडेलवाल, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, कोटा

 

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