3डी प्रिंटिंग तकनीक से जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी : सामान्य सर्जरी से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण था केस, अपनी जगह से खिसक गया था कृत्रिम कप
सर्जरी के कुछ ही हफ्तों बाद इंप्लांट फेल हो गया
सीके बिरला हॉस्पिटल में डॉक्टर ललित मोदी और उनकी टीम ने जटिल रिवीजन हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक। 65 वर्षीय महिला का पहले इंप्लांट फेल हो गया था। 3D प्रिंटिंग और कस्टमाइज्ड इंप्लांट की मदद से सर्जरी की। चुनौतीपूर्ण केस में सटीक योजना से मरीज को नई उम्मीद।
जयपुर। चिकित्सा जगत में नित नई तकनीकों के समावेश ने अब उन मामलों को भी संभव बना दिया है, जिन्हें पहले अत्यधिक जोखिम भरा माना जाता था। ऐसा ही एक मामला सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर में सामने आया, जहाँ सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. ललित मोदी और उनकी टीम ने एक बेहद जटिल 'रिवीजन हिप रिप्लेसमेंट' सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
क्या था मामला?
65 वर्षीय महिला संगीता (परिवर्तित नाम) का करीब एक साल पहले किसी अन्य अस्पताल में हिप रिप्लेसमेंट हुआ था, लेकिन कूल्हे की हड्डी (एसीटैबुलम) के कमजोर होने और बनावट में खराबी (डिफॉर्मिटी) के कारण सर्जरी के कुछ ही हफ्तों बाद इंप्लांट फेल हो गया। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कृत्रिम कप अपनी जगह से खिसक कर पेल्विस के अंदरूनी हिस्से में धंस गया था। इस कारण मरीज पिछले एक साल से चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थी। 3D प्रिंटिंग और कस्टमाइज्ड इंप्लांट का कमाल- डॉ. ललित मोदी ने बताया कि यह केस सामान्य सर्जरी से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण था। डॉ. ललित ने बताया कि सबसे बड़ा जोखिम कप निकालते समय आसपास की रक्त वाहिकाओं को चोट पहुँचने का था। इसके लिए हमने सीटी एंजियोग्राफी के जरिए बारीकी से प्लानिंग की। चूँकि हड्डी में बड़ा डिफेक्ट था, इसलिए सामान्य इंप्लांट काम नहीं कर सकता था। हमने मरीज के सीटी स्कैन के आधार पर 3डी प्रिंटिंग तकनीक से एक कस्टमाइज्ड इंप्लांट तैयार करवाया, जिसे विशेष रूप से मरीज की जरूरत के अनुसार डिजाइन किया गया है।

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