दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बरस रही आग : अस्पतालों में 30 फीसदी बढ़े मरीज, बेहोशी, उल्टी, चक्कर और तेज बुखार जैसी समस्या से आमजन परेशान
हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा
प्रदेशभर में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है। तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी जनित बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी आई है।
जयपुर। प्रदेशभर में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है। तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी जनित बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी आई है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल सहित अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। यहां मेडिसिन ओपीडी में 30 से 35 फीसदी तक इजाफा हो गया है। चिकित्सकों के अनुसार दोपहर के समय बेहोशी, उल्टी, चक्कर और तेज बुखार जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या मजदूर वर्ग, रिक्शा चालकों, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और फिल्ड में काम करने वाले लोगों की है।
क्या होता है हीट स्ट्रोक : हीट स्ट्रोक सबसे गंभीर स्थिति होती है, जिसमें समय पर उपचार नहीं मिलने पर जान का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है। तुरंत उपचार नहीं मिलने पर यह शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाती है और जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार दोपहर 12 से 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान धूप में निकलने से बचना चाहिए।
बच्चों का रखें खास ख्याल: भीषण गर्मी और लू के बढ़ते असर के बीच बच्चों में हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। छोटे बच्चे जल्दी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण :
तेज बुखार
चक्कर और बेहोशी
तेज सिरदर्द
उल्टी और घबराहट
पसीना आना बंद होना
त्वचा का गर्म और सूखा होना
ऐसे करें बचाव :
दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं
दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें
हल्के और सूती कपड़े पहनें
बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें
ओआरएस, छाछ, नींबू पानी का सेवन करें
लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें
बच्चों को हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा :
बच्चों का शरीर जल्दी गर्म हो जाता है
प्यास लगने पर वे खुद पानी नहीं मांगते, इसलिए उन्हें बार-बार पानी की याद दिलाएं।

Comment List