स्कूली जीवन अंधकारमय : राज्य के 41 हजार से अधिक विद्यालयों में मरम्मत की दरकार, 153 स्कूल मंदिरों-धर्मशालाओं में संचालित
स्कूल में सात बच्चों की स्कूल का भवन गिरने से मौत
राज्य में आज भी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और सेकण्डरी स्तर पर बच्चे बीच सत्र में ही या सत्र शुरू होने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। कुछ तो विद्यार्थियों की मजबूरी होती है और इससे अधिक, स्कूल का दूर होना, सुविधाओं का अभाव, छात्राओं के लिए अलग से टायलेट का अभाव और अपराध में बढ़ोतरी मुख्य कारण।
जयपुर। राज्य में आज भी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और सेकण्डरी स्तर पर बच्चे बीच सत्र में ही या सत्र शुरू होने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। कुछ तो विद्यार्थियों की मजबूरी होती है और इससे अधिक, स्कूल का दूर होना, सुविधाओं का अभाव, छात्राओं के लिए अलग से टायलेट का अभाव और अपराध में बढ़ोतरी मुख्य कारण माने जाते हैं। केन्द्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक स्तर पर 3.6 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक स्तर पर 3.6 और सेकण्डरी तक करीब 7.7 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई को अलविदा कह देते हैं। छात्राओं का नामांकन सीनियर सेकण्डरी में घटा- सेकण्डरी स्तर पर नामांकन 81.2 प्रतिशत जबकि सीनियर सेकण्डरी में घटकर मात्र 65.1 प्रतिशत रह गया। वर्ष 2024-25 में राजस्थान में प्राथमिक स्कूलों में नामांकन 88.3 प्रतिशत रहा,जबकि राष्ट्रीय औसत 90.9 प्रतिशत रहा। प्राथमिक स्तर पर बेटियों का नामांकन 89.7 प्रतिशत दर्ज हुआ,जबकि देश का औसत 92.3 प्रतिशत रहा।
राज्य में 45,365 विद्यालय, 41 हजार, 178 में मरम्मत की दरकार- राज्य में 45 हजार, 365 विद्यालय हैं,जिसमें से 41 हजार, 178 विद्यालयों में वृहद स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है। भाजपा विधायक संदीप शर्मा के 16 वीं विधानसभा के पंचम सत्र में लगे प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि 45, हजार 365 में से 41 हजार, 178 को मरम्मत की आवश्यकता है। इसमें से 3768 विद्यालयों को जर्जर चिह्नित किया गया है।
पांच हजार, 445 पद प्रधानाचार्यों के रिक्त- प्रदेश में पांच हजार, 445 पद प्रधानाचार्यों के खाली हैं। विधायक थावरचन्द के प्रश्न के जवाब में पांचवें सत्र में शिक्षा मंत्री ने बताया कि 5445 प्रधानाचार्य, 1036 पद उपप्रधानाचार्य सहित कुल 86 हजार, 369 पद खाली चल रहे हैं।
153 स्कूल मंदिरों-धर्मशालाओं में संचालित- राज्य में 153 सरकारी स्कूल भवनों के अभाव में मंदिर,धर्मशालाओं और निजी मकानों में चल रहे हैं। कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूल मंदिरों के कमरों, खुले मैदानों और टीनशेड में संचालित हो रहे हैं। पिछले साल झालावाड़ जिले के एक स्कूल में सात बच्चों की स्कूल का भवन गिरने से मौत हो गई थीं।
ड्रॉप आउट सुधारने के प्रयास
ड्रॉप आउट सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सीताराम जाट, निदेशक माध्यमिक शिक्षा,बीकानेर
सरकार को ड्रॉप आउट पर फोकस करना चाहिए। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं नहीं होने से बच्चे बीच सत्र में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
-डॉ.बनय सिंह,शिक्षक नेता,जयपुर

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