आवासन मंडल की 42 बीघा जमीन पर अतिक्रमणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई, जेसीबी मशीनों के साथ ट्रेक्टर-ट्राली एवं मजदूरों को किया तैनात
ल ने अपनी जमीन पर कब्जा लेना शुरू कर दिया
राजस्थान आवासन मंडल ने टोंक रोड बी-2 बाईपास स्थित 42 बीघा 10 बिस्वा जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया। 15 जेसीबी, भारी पुलिस बल और अधिकारियों की मौजूदगी में श्रीराम विहार कॉलोनी के निर्माण ध्वस्त किए गए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंडल ने जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू की।
जयपुर। राजस्थान आवासन मंडल प्रशासन ने टोंक रोड स्थित बीटू बाईपास स्थित करीब 42 बीघा जमीन पर शुक्रवार को अतिक्रमणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान मंडल के अधिकारी कर्मचारियों के साथ ही भारी पुलिस जाब्ता उपस्थित रहा। जमीन का बाजार मूल्य करीब 2200 करोड़ रुपए आंका जा रहा है। मंडल प्रशासन ने दुर्गापुरा स्थित चैनपुरा गांव में श्रीराम विहार नाम से बसाई गई कॉलोनी में निर्माणों को हटाने के लिए भारी पुलिस जाब्ता एवं संसाधनों के साथ ही मंडल के अधिकारी कर्मचारियों की उपस्थिति के बाद सुबह करीब दस बजे से कार्रवाई करना शुरू कर दिया। इसके लिए करीब 15 जेसीबी मशीनों के साथ ही ट्रेक्टर ट्राली एवं मजदूरों को तैनात किया। मंडल सचिव गोपाल सिंह शेखावत ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद मंडल ने अपनी जमीन पर कब्जा लेना शुरू कर दिया है।
शेखावत ने बताया कि ग्राम चैनपुरा स्थित खसरा संख्या 7, 15 से 24, 26 से 31 तथा दुर्गापुरा स्थित खसरा संख्या 265 से 270 तक की कुल 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि राजस्थान आवासन मण्डल की अवाप्तशुदा संपत्ति है। इस भूमि की अवाप्ति अधिसूचना 10 जनवरी 1990 को जारी की गई थी तथा 5 दिसंबर 1991 को नगरीय विकास एवं आवासन विभाग राजस्थान सरकार द्वारा अवार्ड जारी होने के बाद मण्डल ने विधिवत कब्जा प्राप्त कर लिया था। इसके बावजूद खातेदारों द्वारा कथित रूप से अवैध इकरारनामों के माध्यम से भूमि को जवाहर गृह निर्माण सहकारी समिति को बेचान कर दिया गया। बाद में समिति द्वारा श्रीराम कॉलोनी के नाम से अवैध पट्टे जारी किए गए। उन्होंने बताया कि प्रकरण में उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 9 अप्रैल 2026 को राजस्थान आवासन मण्डल की रिट याचिका संख्या 15576/2019 को स्वीकार करते हुए श्रीराम कॉलोनी एवं अन्य पक्षकारों की याचिकाएं खारिज कर दीं तथा सोसायटी द्वारा किए गए इकरारनामों को शून्य घोषित कर दिया।
इसके विरुद्ध दायर अपीलों में प्रारंभिक स्थगन आदेश पारित किया गया था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने 18 मई 2026 को पारित आदेश के परिप्रेक्ष्य में अतिक्रमण हटाने के लिए विमोचित कर दिया। इस अवसर पर मुख्य अभियन्ता अमित अग्रवाल प्रतीक श्रीवास्तव, मुख्य सम्पदा प्रबन्धक अशोक कुमार, उप आवासन आयुक्त प्रताप नगर संजय शर्मा सहित अन्य उप आवासन आयुक्त, आवासीय अभियन्ता, वरिष्ठ विधि अधिकारी, राजस्थान आवासन बोर्ड कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गोहन सिंह, महामंत्री रमेश शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविन्द नाटाणी सहित जयपुर स्थित कार्यालयों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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