सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रैबीज पीड़ित कुत्ताें को दया मृत्यु देने की अनुमति संबंधी एनजीओ की याचिका पर सुनवाई से इनकार

सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रैबीज पीड़ित कुत्ताें को दया मृत्यु देने की अनुमति संबंधी एनजीओ की याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने के खिलाफ दायर एनजीओ की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्रियों के बयानों के आधार पर आदेश नहीं बदले जाते। पूर्व आदेश के तहत केवल रैबीज पीड़ित, लाइलाज और अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को ही दया मृत्यु देने की अनुमति है।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक एनजीओ की ओर से दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि कुछ खास परिस्थितियों में कुत्तों को दया मृत्यु देने की अनुमति देने वाले उसके हालिया आदेश का अर्थ आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने की मंजूरी देना नहीं निकाला जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह याचिका एनजीओ 'एनिमल्स आर पीपल टू' ने दायर की थी। इसमें चिंता जतायी गयी थी कि अधिकारी कुत्तों को गैरकानूनी तरीके से मारने या उन्हें हटाने को सही ठहराने के लिए अदालत के निर्देशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं।

इस मामले में पेश हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है और इसे कानून के खिलाफ जाकर लागू किया जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री के एक सार्वजनिक बयान का जिक्र करते हुए अधिवक्ता ने कहा, "पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है कि उच्चतम न्यायालय ने सभी स्वानों को मारने की खुली छूट दे दी है।" न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने टिप्पणी की, कि सार्वजनिक पद संभालने वाले लोगों के बयानों के आधार पर अदालत से आदेश में बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें अपना आदेश बदलने की जरूरत है।" शीर्ष अदालत ने 19 मई के अपने आदेश में सख्त वैधानिक नियमों के अनुसार रैबीज पीड़ित, लाइलाज और प्रत्यक्ष रूप से खतरनाक या आक्रामक कुत्तों को दया मृत्यु देने की अनुमति दी थी।

आवारा कुत्तों के मुद्दे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की कार्यवाही में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने ये निर्देश जारी किये थे। पीठ ने आवारा कुत्तों के काटने की 'अत्यंत परेशान करने वाली' घटनाओं, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों से जुड़े मामलों की रिपोर्टों पर गौर करने के बाद नवंबर में जारी अपने पिछले निर्देशों में किसी तरह के संशोधन से इनकार कर दिया था। इनमें अधिकारियों को विभिन्न सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।

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