एक हैंडपंप के सहारे पूरा गांव, पेयजल संकट से जूझ रहे झोटोली के ग्रामीण
रोजाना गांव से बाहर जाकर पानी ला रही महिलाएं
एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा पीने का, फ्लोराइडयुक्त जल से बढ़ी परेशानी।
सुल्तानपुर। क्षेत्र के झोटोली गांव में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। गांव के लोगों को पीने लिए करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पूरे गांव की ननिर्भरता एकमात्र हैंडपंप पर होने के कारण ग्रामीणों को घंटों लाइन में खड़े रहकर पानी भरने का इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल एसमस्या को लेकर पिछले विधानसभा चुनाव में गांव के लोगों ने मतदान - बहिष्कार का निर्णय लिया था। उस समय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद कुछ लोगों ने मतदान किया। लेकिन कर करीब पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद या गांव में पेयजल संकट का स्थायी कर समाधान नहीं हो सका।
दस वर्षों से बनी हुई है समस्या
ग्रामीण मायाराम गोचर ने बताया कि गांव के अधिकांश हैंडपंपों का पानी फ्लोराइडयुक्त है, जो न तो पीने योग्य है और न ही भोजन बनाने के लिए मान उपयोगी। इसके चलते ग्रामीणों को बाबा शाह वली की दरगाह के समीप स्थित हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह समस्या पिछले करीब दस वर्षों से बनी हुई है।
समय रहते समाधान जरूरी
ग्रामीण रामप्रताप गोस्वामी ने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। एक ही हैंडपंप होने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा दरगाह पर आनें वाले यात्रियों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
ग्रामीण महिला रेनू गोचर ने बताया कि घर-परिवार के दैनिक कार्यों में पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में महिलाओं को रोजाना गांव से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका काफी समय और श्रम खर्च होता है। उन्होंने कहा कि दिनभर की चिंता यही रहती है कि पीने के पानी की व्यवस्था कैसे होगी।
कुआं भी नहीं रहा उपयोगी
ग्रामीण परमानंद गोचर ने बताया कि पहले गांव के कुएं और हैंडपंपों का पानी पीने योग्य था, लेकिन समय के साथ पानी की गुणवत्ता खराब होती गई। फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से पानी पीने लायक नहीं रहा। गांव का पुराना कुआं भी गंदगी के कारण पेयजल के उपयोग में नहीं लिया जा सकता।
इनका कहना है
ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
- दीपक महावर, उपखंड अधिकारी, दीगोद

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