मातमी धुनों पर निकले ताजिये, देर रात कर्बला में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया
विभिन्न हिस्सों से ताजिये बड़ी चौपड़ लाए जाने लगे
जयपुर। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा) पर शुक्रवार को गुलाबी नगरी में मातमी धुनों के साथ ताजिये निकाले गए, जिन्हें देर रात कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
दोपहर बाद से ही परकोटे के विभिन्न हिस्सों से ताजिये बड़ी चौपड़ लाए जाने लगे। बाद में उन्हें एक साथ जुलूस के रूप में कर्बला ले जाया गया। ताजियों के भ्रमण के दौरान शिया समाज के युवकों ने पुरानी परंपरा का निर्वहन करते मातम मनाया। खुद को लहूलुहान कर करबला की दर्दनाक घटना और इमाम हुसैन की मुसीबतों को याद किया। शहर के विभिन्न स्थानों पर मजलिसों का आयोजन भी हुआ, जिनमें इमाम हुसैन की शहादत और उनके संदेश पर प्रकाश डाला गया। जुलूस मार्ग पर जगह-जगह सामाजिक संस्थाओं एवं स्थानीय लोगों की ओर से छबील लगाकर शर्बत पिलाया गया।

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