6 करोड़ की लागत से तैयार मोर्चरी, अब 40 लाख के काम से अटकी
नई मोर्चरी में 15-20 शवों के सुरक्षित संरक्षण की व्यवस्था
कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) की लेट-लतीफी के चलते स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में बनी अत्याधुनिक मोर्चरी का काम अधरझूल में अटका हुआ है। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से हाड़ौती की सबसे आधुनिक मोर्चरी बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन बाहरी निर्माण कार्यों के अटके होने से इसका लाभ मेडिकल स्टूडेंट्स और आमजन को नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में अस्पताल की पुरानी मोर्चरी में कई बार ज्यादा शव होने के कारण मृतकों के परिजनों को पोस्टमार्टम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
यह काम बाकी, लिखे पत्र अब 40 लाख मंजूर
अस्पताल प्रशासन की ओर से केडीए को काम जल्द पूरा करने के लिए पत्र भी भेजा जा चुका है। नई मोर्चरी में अभी एप्रोच रोड का काम बाकी है, जिससे शवों को लाने-ले जाने के लिए ट्रॉली और स्ट्रेचर आसानी से आ सकें। इसके अलावा बाहर रेलिंग व सड़क का निर्माण होना है। इन बाहरी कामों के लिए केडीए द्वारा अलग से 40 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था, जिसमें से पाइपलाइन शिफ्टिंग का काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन सड़क और रेलिंग का काम अभी भी बाकी है। ठेकेदार फर्म ने इसके लिए 50 दिन का समय मांगा था, जिसमें से 15 दिन गुजर चुके हैं।
छात्र देख सकेंगे लाइव पोस्टमार्टम
केडीए ने इस मॉडर्न मोर्चरी को पोस्टमार्टम के साथ-साथ मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई को ध्यान में रखकर तैयार किया है। इसके ऊपर एक सेंट्रल एसी डेमोंस्ट्रेशन रूम बनाया गया है, जहां बड़ी एलईडी स्क्रीन, सीसीटीवी, इंटरनेट और वाई-फाई की सुविधा है। यहाँ दो टेबल पर एक साथ पोस्टमार्टम के दौरान लगभग 75 छात्र लाइव एनाटॉमी देख सकेंगे। शवों को ऊपर लाने के लिए लिफ्ट की व्यवस्था की गई है। इस नई मोर्चरी में एक साथ 15 से 20 शवों को सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था है, जबकि खराब हो चुके शवों के लिए अलग आउटर रूम बनाया गया है।
1418 फीट का कूलिंग चैंबर
मोर्चरी में पुराना रेफ्रिजरेटर सिस्टम हटाकर 1418 फीट का पूरा कमरा ही कूलिंग चैंबर के रूप में तैयार किया गया है। अब शवों को रेफ्रिजरेटर की स्लाइडिंग रेक में डालने और निकालने के लिए 2 से 4 लोगों की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सीधे स्ट्रेचर सहित बॉडी को कमरे में रख दिया जाएगा। इससे लेबर की भी बचत होगी। विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक मूंदड़ा ने बताया कि कूलिंग चैंबर को ठंडा रखने के लिए दो अलग-अलग यूनिट लगाई गई हैं, जो अभी अपनी आधी क्षमता पर काम कर रही हैं। यदि तकनीकी खराबी से एक यूनिट बंद भी हो जाए, तो दूसरी यूनिट लगातार काम करती रहेगी, जिससे शवों को कोई नुकसान नहीं होगा।
परिजनों और पुलिस के लिए भी बेहतर सुविधाएं
नई मोर्चरी में चिकित्सकों व स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग कक्ष, मृतकों के परिजनों के बैठने की सुव्यवस्थित जगह, ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर, वाहन पार्किंग और पुलिसकर्मियों के बैठने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। पोस्टमार्टम विभाग के अध्यक्ष ने बताया कि यहाँ सुबह 8 से 2 और दोपहर बाद दो पारियों में डॉक्टरों की ड्यूटी तय की गई है। सरकारी नियमानुसार सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम नहीं होता, इसलिए रात को आने वाले शवों का पोस्टमार्टम सुबह ही किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, काम जल्दी पूरा कराने के लिए डेली मॉनिटरिंग की जा रही है और ठेकेदार फर्म के साथ लगातार कॉर्डिनेशन जारी है ताकि इसे जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।
आधुनिक मोर्चरी तकनीकी व मेडिकली रूप से तैयार हो गई थी, बाहर के कुुछ काम बाकी रह गए थे। इनके लिए अभी केडीए ने टेण्ड़र जारी किया था जिसके बाद काम शुरू हो गया है। अब जल्दी ही यह शुरू हो जाएगी।
-डॉ. अशोक मून्दड़ा, विभागाध्यक्ष

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