भरत तिवारी प्रकरण को लेकर काशी में सड़कों पर उतरा केसरिया भारत, दोषियों पर कार्रवाई की उठी मांग
निष्पक्ष जांच की मांग
वाराणसी। बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी की एनकाउंटर में हुई मौत के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को केसरिया भारत के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह के नेतृत्व में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन एडीएम द्वितीय विक्रमजीत सिंह को सौंपा।
सिंह ने कहा कि बिहार पुलिस द्वारा 17 जून को दिनदहाड़े भरत तिवारी का फर्जी एनकाउंटर कर हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना में मानवीय मूल्यों की मर्यादा तार-तार कर दी गई, वहीं स्थानीय पुलिस ने भी अपने नैतिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा हार्डकोर नक्सलियों और आतंकवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने के लिए पुनर्वास संबंधी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। इसके विपरीत, भरत तिवारी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। दबे-कुचले लोगों की आवाज उठाने तथा आत्मसमर्पण करने के बावजूद उन्हें कई गोलियां मारकर सुनियोजित तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया।
सिंह ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, जो पूरी तरह विधि-विरुद्ध है। ऐसी परिस्थितियों में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई किया जाना आवश्यक और न्यायसंगत है, जिससे आम जनमानस में व्याप्त आक्रोश को शांत किया जा सके।

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