नीट पुनर्परीक्षा पर सियासी संग्राम तेज: कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, परीक्षा गड़बड़ियों पर जवाबदेही की मांग
कर्नाटक में तेज हुआ सियासी घमासान
बेंगलुरु। नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से जुड़ा विवाद कर्नाटक में तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गया है। कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया है। कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधान परिषद में विपक्ष के नेता बीके हरिप्रसाद ने सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में हुई चूकों से ध्यान भटकाने के लिए 'आरोप-प्रत्यारोप का खेल' खेल रहा है।
बेंगलुरु में पत्रकारों को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने नीट जैसी बड़े पैमाने की परीक्षाओं के संचालन को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाये। इसके साथ ही उन्होंने पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं के बार-बार लगते आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि जहां कांग्रेस ने परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और छात्रों की परेशानी को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक एहतियाती कदम उठाये थे, वहीं केंद्र सरकार इस व्यवस्था से जुड़ी कमियों को दूर करने में पूरी तरह विफल रही।
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया, "हमने सभी सावधानियां बरती थीं। अगर हम ऐसा नहीं करते तो हजारों छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता। भाजपा ने क्या एहतियात बरती है? यह केवल एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल है। वे अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।" कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने बेंगलुरु में पुनर्परीक्षा प्रक्रिया के दौरान यातायात नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय किया था, ताकि छात्रों को कोई असुविधा न हो।
उन्होंने यूपीएससी और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े पिछले विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का बार-बार होना परीक्षा प्रणाली की गहरी ढांचागत समस्याओं को दर्शाता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद अब तक जवाबदेही क्यों तय नहीं की गयी है। उन्होंने यह घोषणा भी की कि कांग्रेस उन छात्रों की शिकायतों की जांच के लिए समर्पित टीम का गठन करेगी, जिन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था और आवश्यकतानुसार सहायता देने का वादा किया।
उन्होंने कहा, "अगर इन परिस्थितियों के कारण किसी भी बच्चे को परेशानी उठानी पड़ी है, तो हम उसकी जांच करेंगे। हम छात्रों को हुई दिक्कतों को समझने के लिए टीम भेजेंगे। यदि मुआवजे की आवश्यकता होगी तो हम वह भी प्रदान करेंगे।" इस बीच गड़बड़ियों के आरोपों के बाद बढ़ी सतर्कता और कड़ी निगरानी के बीच पूरे भारत और कुछ चुनिंदा विदेशी केंद्रों पर नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा आयोजित की गयी।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और केंद्र सरकार के सोशल मीडिया पर चल रहे प्रश्नपत्र लीक के दावों को 'फर्जी' और निराधार बताकर खारिज करने के बाद यह विवाद और गहरा गया। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की तथ्य अन्वेषण इकाई ने भी टेलीग्राम पर पेपर लीक का दावा करने वाले वायरल वीडियो को भ्रामक और गलत सूचना करार देते हुए खारिज कर दिया। दोनों पक्षों की ओर से लग रहे आरोपों-प्रत्यारोपों के कारण नीट का मुद्दा एक बार फिर से राजनीतिक रूप से संवेदनशील और बड़ा विवाद बन गया है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा संचालन व्यवस्था और जवाबदेही की ओर सबका ध्यान खींचा है।

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