शिक्षा के सारथी : हौसलों के तरकश में कोशिश का तीर जिंदा रख, खेल के मैदान में गढ़ रही हैं पीटीआई देश का भविष्य
मिट्टी से सोना तराश रहीं महिला शिक्षक
अब तक दो हजार से अधिक बालिकाओं और महिला अध्यापकों को आत्मरक्षा की बेहतरीन ट्रेनिंग दे चुकी हैं।
कोटा। हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर जीतने की वो उम्मीद जिंदा रख। जिले के डाबर बंमोरी कला में कार्यरत महिला शारीरिक शिक्षक पदमा राठौर की कहानी इस कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करती है।
खेल के मैदान पर पदमा राठौर आज सिर्फ एक शिक्षिका नहीं,बल्कि प्रतिभाएं गढ़ने वाली 'द्रोणाचार्य' बन चुकी हैं। सरकारी स्कूल की कमान संभालते ही उन्होंने दो हजार से अधिक बालिकाओं और अध्यापकों को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर उन्हें फौलाद बना दिया। खेल के मैदान से लेकर कला की दुनिया तक अपनी अटूट जिद से बच्चों का भविष्य संवारने वाली और भामाशाहों के सहयोग से सरकारी स्कूलों को डिजिटल लुक देने वाली इस जांबाज पीटीआई को राजस्थान सरकार वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से भी नवाज चुकी है।
जोधपुर से शुरू हुआ था सफर
शिक्षिका पदमा राठौर ने बताया कि उनका चयन वर्ष 1998 में जोधपुर शारीरिक शिक्षक कॉलेज से हुआ था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1999 में उदयपुर स्थित कॉलेज से एक वर्ष का कड़ा प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) लिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वर्ष 2002 में उन्होंने सुल्तानपुर के सारोला स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) के रूप में अपनी पहली जॉइनिंग की और यहीं से उनके सपनों को उड़ान मिली।
खुद रहीं स्टेट चैंपियन, शिष्यों को पहुंचाया सेना और पुलिस में
शारीरिक शिक्षिका पदमा राठौर खेल की दुनिया का एक बड़ा नाम रही हैं। वे खुद राज्य स्तर पर (स्टेट चैंपियन) स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेता रही हैं और उन्होंने अपनी टीम को भी कई मेडल दिलवाए हैं। खेल के प्रति उनके इसी गहरे अनुभव के चलते उन्हें कई राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में निर्णायक (अंपायर) और चयन समिति (सिलेक्शन कमेटी) के सदस्य जैसी अहम जिम्मेदारियां भी मिली हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उनके तराशे हुए विद्यार्थी आज भारतीय सेना, पुलिस विभाग और खुद पीटीआई बनकर अलग-अलग सरकारी महकमों में देश सेवा कर रहे हैं।
आत्मरक्षा का पाठ पढ़ाया, अखाड़े और कला के क्षेत्र में भी गढ़ीं प्रतिभाएं
पदमा राठौर ने लीक से हटकर काम करते हुए अब तक दो हजार से अधिक बालिकाओं और महिला अध्यापकों को आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) की बेहतरीन ट्रेनिंग दी है, ताकि बेटियां आत्मनिर्भर होकर निडर बन सकें। खेल के मैदान पर उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने करीब 300 से 400 विद्यार्थियों को कबड्डी में राज्य स्तर तक पहुंचाया है। कबड्डी के साथ-साथ उन्होंने पारंपरिक अखाड़े के खिलाड़ी भी तैयार किए हैं। यही नहीं, खेल के अलावा उनके मार्गदर्शन में स्कूल के छात्र-छात्राओं ने पेंटिंग और कला (आर्ट) के क्षेत्र में जिला और राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं को जीतकर स्कूल का नाम रोशन किया है।
भामाशाहों के सहयोग से बदली स्कूलों की तस्वीर
शारीरिक शिक्षक होने के साथ-साथ पदमा राठौर ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने में भी बड़ा मिसाल कायम की। अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने स्थानीय भामाशाहों को प्रेरित किया और उनके सहयोग से स्कूलों में आकर्षक रंग-रोगन करवाकर कक्षा-कक्षों को सुसज्जित और 'डिजिटल लुक' दिया। स्कूल परिसर में छात्रों की सुविधा के लिए नए कमरों का निर्माण करवाया।पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधारोपण किया और खुद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली। स्कूल परिसर में विद्या की देवी मां सरस्वती का भव्य मंदिर बनवाया।
मुख्यमंत्री शर्मा ने मंच पर किया था सम्मानित
शिक्षिका पदमा राठौर की यह नि:स्वार्थ मेहनत रंग लाई और उनकी जिंदगी में वह ऐतिहासिक क्षण भी आया, जिसका हर शिक्षक को इंतजार रहता है। वर्ष 2024 में जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर सहित कई दिग्गज अतिथियों ने उन्हें मंच पर बुलाकर प्रशस्ति पत्र, शॉल और नकद राशि देकर सम्मानित किया।

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