चीन ने निजी स्कूलों और ट्यूशन इंडस्ट्री पर कसा शिकंजा, 100 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित
बच्चों का मानसिक दबाव कम करने हेतु चाइना का बड़ा कदम
चीन ने शिक्षा का व्यवसायीकरण रोकने के लिए कक्षा 1 से 9 तक के निजी स्कूलों और मुनाफे वाली कोचिंग पर पाबंदी लगा दी है। बच्चों का मानसिक दबाव कम करने हेतु अब ट्यूशन कंपनियां विदेशी निवेश या शेयर बाजार से फंड नहीं जुटा सकेंगी। इस ऐतिहासिक फैसले से $100 अरब की ट्यूशन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आएगा।
बीजिंग। चीन ने अपनी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 6 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित लाभ कमाने वाले निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला प्राथमिक और जूनियर सेकेंडरी शिक्षा यानी कक्षा 1 से 9 तक लागू किया गया है। नई नीति के तहत अब स्कूल विषयों की पढ़ाई कराने वाली कंपनियां मुनाफा नहीं कमा सकेंगी, विदेशी निवेश नहीं ले सकेंगी और शेयर बाजार से पूंजी जुटाने पर भी रोक रहेगी। कई कंपनियों को गैर-लाभकारी संस्था में बदलने या संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले से चीन की करीब 100 अरब डॉलर की निजी ट्यूशन इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। कई बड़ीं शिक्षा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सरकार ने सप्ताहांत और छुट्टियों में ट्यूशन, विदेशी पाठ्यक्रम और बच्चों पर अधिक होमवर्क जैसे मामलों पर भी रोक लगाई है।
चीन का कहना है कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और महंगी शिक्षा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवारों पर असर डाल रही थी। हालांकि प्रतिबंधों के बावजूद देश में निजी ट्यूशन की मांग अब भी बनी हुई है।

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