कोटा के पीडब्ल्यू विद्यापीठ के छात्र हर्ष वर्धन कुमार का कमाल, जेईई मेंन्स में 66 से 99 पर्सेंटाइल तक पहुँचे

असंभव को बनाया संभव

कोटा के पीडब्ल्यू  विद्यापीठ के छात्र हर्ष वर्धन कुमार का कमाल, जेईई मेंन्स में 66 से 99 पर्सेंटाइल तक पहुँचे

कोटा के हर्ष वर्धन कुमार ने JEE Main में चमत्कारिक सुधार कर सबको चौंका दिया। सेशन 1 में 66 परसेंटाइल लाने के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी और सटीक रणनीति व PW विद्यापीठ के गुरुजनों के मार्गदर्शन से सेशन 2 में 99 परसेंटाइल हासिल किए। उनकी यह सफलता निरंतरता और खुद पर भरोसे की जीत है।

प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए मेहनत, सही रणनीति और लगातार प्रयास बहुत जरूरी होते हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण कोटा में तैयारी कर रहे छात्र हर्ष वर्धन कुमार ने पेश किया है, जिन्होंने JEE Main Session 1 में 66 पर्सेंटाइल से Session 2 में 99 पर्सेंटाइल हासिल कर एक शानदार सुधार दर्ज किया। उनकी यह यात्रा न केवल संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है, बल्कि यह दिखाती है कि सही दिशा में की गई मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इस शानदार उपलब्धि के पीछे की कहानी और उनकी तैयारी की रणनीति को जानने के लिए हमने हर्ष वर्धन कुमार से खास बातचीत की:

आपकी JEE Main Session 1 से Session 2 तक की यात्रा कैसी रही? इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या था?

मेरी JEE Mains Session 1 से Session 2 तक की यात्रा इतनी अप्रत्याशित रही है कि मुझे खुद भी विश्वास नहीं था कि मैं इतना अच्छा परिणाम हासिल कर पाऊँगा। इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 2-3 कारण थे। जब मैं छठ पूजा के बाद कोटा वापस आया, तब मुझे एहसास हुआ कि समय हाथ से निकलता जा रहा है। मुझे लगा कि अगर अब कुछ नहीं किया, तो खाली हाथ घर वापस जाना पड़ेगा। दूसरी बात यह थी कि मुझे खुद पर थोड़ा भरोसा था; क्योंकि मैंने पहले भी कई एग्जाम्स आखिरी समय में एक सटीक रणनीति के दम पर निकाले थे। बस इसी आत्मविश्वास ने मुझे आगे बढ़ाया।

आपने खुद बताया कि शुरुआत में पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी—तो फिर ऐसा कौन-सा मोड़ आया जिसने आपको मेहनत करने के लिए प्रेरित किया?

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ऐसा नहीं था कि मेरी पढ़ाई में रुचि नहीं थी, लेकिन जब कुछ समझ नहीं आता था, तो पढ़ने का मन भी नहीं करता था। उदाहरण के लिए, मेरी केमिस्ट्री बहुत कमजोर थी, यहाँ तक कि मुझे 11वीं की केमिस्ट्री भी समझ नहीं आती थी। इसके विपरीत, मैथ्स में मैं शुरू से अच्छा था और फिजिक्स भी औसत था। लेकिन Session 1 के बाद मुझे समझ आया कि अगर स्कोर बढ़ाना है, तो केमिस्ट्री पर फोकस करना ही होगा, और मैंने वही किया।

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PW Vidyapeeth Kota ने आपकी सफलता में किस तरह से भूमिका निभाई? क्या कोई खास शिक्षक या रणनीति थी जिसने आपको मदद की?

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मेरी सफलता की कहानी में कोटा PW विद्यापीठ और वहां के अनुभवी गुरुजनों का योगदान अतुलनीय है। यहाँ के शिक्षकों के मार्गदर्शन ने न केवल मेरे ज्ञान को बढ़ाया, बल्कि मुश्किल विषयों के प्रति मेरा नजरिया भी बदल दिया। जैसे कि ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में राहुल पारीक सर (RP Sir) जैसा कोई नहीं है; मेरा मानना है कि अगर किसी छात्र को उनसे यह विषय समझ नहीं आया, तो शायद ही कोई और उसे समझा पाएगा। फिजिक्स में अंशुल गुप्ता सर ने मेरी नींव मजबूत की, उन्होंने मुझे केवल फॉर्मूले रटने के बजाय वैचारिक स्पष्टता पर ध्यान केंद्रित करना सिखाया, जो परीक्षा के दौरान बहुत मददगार साबित हुआ। वहीं गणित के क्षेत्र में महेश जैन सर एक सच्चे 'लिजेंड' हैं, जिनसे बेहतर शिक्षक मैंने आज तक नहीं देखा। साथ ही, राजीव रस्तोगी सर की विशेषज्ञता का दायरा सिर्फ JEE तक सीमित नहीं था, बल्कि वे दुनिया भर के विभिन्न और कठिन प्रकार के सवालों से हमारा परिचय कराते थे; उनकी मेहनत का स्तर यह है कि अक्सर उनके नोट्स से सीधे सवाल मुख्य परीक्षा में मिल जाते हैं। इन सभी गुरुजनों के सामूहिक प्रयासों और कोटा विद्यापीठ के बेहतरीन माहौल ने ही मेरी सफलता का मार्ग प्रशस्त किया।

इस सफर में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आपने उन्हें कैसे पार किया?

66 परसेंटाइल से 99 परसेंटाइल तक का सफर बहुत कठिन था, लेकिन नामुमकिन नहीं। सबसे बड़ी चुनौती थी उन 2-3 महीनों में कंसिस्टेंसी बनाए रखना। अक्सर ऐसा होता था कि एक हफ्ते तक 10-12 घंटे पढ़ने के बाद मन भटकने लगता था कि 'आज रहने देते हैं', लेकिन मैंने खुद को रुकने नहीं दिया। मैंने पहले दिन जो JEE Mains का एनालिसिस करके प्लान बनाया था, उसे पूरी ईमानदारी से फॉलो किया कि क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है।

अब आगे के लिए आपके क्या लक्ष्य और भविष्य की योजनाएँ हैं? क्या आप अन्य छात्रों को कोई संदेश देना चाहेंगे?

फिलहाल मैं अपनी पूरी ऊर्जा के साथ JEE Advanced की तैयारी में जुटा हूँ और अपना शत-प्रतिशत योगदान दे रहा हूँ। हालाँकि मुझे इस बात का सटीक अंदाजा नहीं है कि मैं सिर्फ कट-ऑफ क्लियर कर पाऊँगा या मेरी रैंक अंडर 5000 आएगी, लेकिन मैं अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा हूँ। अब मैं मानसिक रूप से काफी शांत और तनावमुक्त महसूस करता हूँ क्योंकि मैं स्वयं को एक सुरक्षित स्थिति में पाता हूँ। अन्य तैयारी करने वाले छात्रों को मैं यही मशविरा दूँगा कि सबसे पहले अपने शिक्षकों पर अटूट भरोसा रखें; उनका अनुभव आपसे कहीं अधिक है और उनकी बातें भले ही कभी कड़वी लगें, पर वे हमेशा आपके हित में होती हैं। साथ ही, अपनी पढ़ाई में कंसिस्टेंसी बनाए रखें, चाहे क्लासेस ऑनलाइन हों या ऑफलाइन, उन्हें नियमित रूप से अटेंड करें। केवल लेक्चर देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक अभ्यास और PYQs को हल करना अनिवार्य है। कभी भी यह गलतफहमी न पालें कि आप केवल दो विषयों के सहारे JEE फतह कर लेंगे; यदि कोई विषय कठिन लगता है, तो उससे जी चुराने के बजाय उस पर डटकर मेहनत करना ही एकमात्र विकल्प है। अंत में मेरा यही मानना है कि यदि आप पूरी ईमानदारी से अपनी प्रक्रिया यानी 'प्रोसेस' को फॉलो करते हैं, तो लक्ष्य स्वयं ही हासिल हो जाएगा।

 

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