'कॉकरोच जनता पार्टी' पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर: सीबीआई जांच की मांग; उच्चतम न्यायालय का सुनवाई से इंकार, कहा- इतना भावुकता से न लें

कॉकरोच जनता पार्टी न्यायपालिका की छवि को पहुंचा रही नुकसान

'कॉकरोच जनता पार्टी' पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर: सीबीआई जांच की मांग; उच्चतम न्यायालय का सुनवाई से इंकार, कहा- इतना भावुकता से न लें

सुप्रीम कोर्ट ने "कॉकरोच जनता पार्टी" आंदोलन के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि इसे इतनी भावुकता से न लें। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन अदालत की एक टिप्पणी के बाद फर्जी वकीलों और डिग्रियों के विरोध में शुरू हुआ था।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की हालिया "कॉकरोच" टिप्पणी के बाद उभरा था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एन के गोस्वामी ने सोमवार को तर्क दिया कि "कॉकरोच जनता पार्टी" न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी एम पंचोली की पीठ ने जवाब देते हुए कहा, "इसे इतना भावुकता से न लें।"

एक अन्य अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता फर्जी कानून की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, साथ ही यह भी तर्क दिया कि अदालत में होने वाली बातचीत का व्यावसायिक रूप से दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। हम देखेंगे।" "कॉकरोच जनता पार्टी" इस महीने की शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में उभरी, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, विशेष रूप से युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की। इस आंदोलन की शुरुआत 15 मई को उच्चतम न्यायालय में हुई कार्यवाही से हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेरोजगार युवा वकीलों के वकालत छोड़कर सोशल मीडिया और आरटीआई सक्रियता की ओर रुख करने पर चिंता व्यक्त की थी।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी, "ऐसे युवा तिलचट्टों की तरह हैं जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन गये हैं।" मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी फर्जी योग्यताओं और फर्जी डिग्रियों के माध्यम से पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों पर लक्षित थी, न कि सामान्य रूप से बेरोजगार युवाओं पर।

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