‘द बैटल ऑफ नरनौल’ पर खास लेखक सत्र: राव तुला राम की वीरता और 1857 के संग्राम की अनकही गाथा पर चर्चा
इतिहास का पुनर्जागरण: 'द बैटल ऑफ नरनौल' पर विशेष चर्चा
जयपुर के क्लॉक टावर में कुलप्रीत यादव और मधुर राव ने 1857 के नायक राव तुला राम की वीरता पर आधारित अपनी पुस्तक पर चर्चा की। लेखकों ने इस गुमनाम युद्ध के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में राव तुला राम के वंशज राव राघवेंद्र सिंह भी शामिल हुए, जिन्होंने नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ने की प्रेरणा दी।
जयपुर। जयपुर के क्लॉक टावर में रविवार को इतिहास, साहित्य और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जब 2- पेजेज बुक क्लब की ओर से पुस्तक ‘द बैटल ऑफ नरनौल’ पर विशेष लेखक सत्र आयोजित किया गया। पेंगुइन रैंडम हाउस और क्लॉक टावर के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक Kulpreet Yadav और सह-लेखक Madhur Rao ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे भीषण लड़ाइयों में से एक पर आधारित इस किताब के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में 1857 के महान योद्धा Rao Tula Ram की वीरता, नेतृत्व और रणनीतिक कौशल पर गहन मंथन हुआ। लेखकों ने बताया कि यह पुस्तक 1857 के संग्राम की उस ऐतिहासिक लड़ाई को सामने लाती है, जिसे इतिहास में अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में राव तुला राम के पर-परपोते राव राघवेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने पूर्वज की वीरता और देशभक्ति की विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राव तुला राम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी रणनीतिकार भी थे।
लेखक कुलप्रीत यादव ने बताया कि राव तुला राम ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए वर्षों तक संसाधन जुटाए और राजपूताना के कई शासकों के साथ गुप्त गठबंधन बनाए। उन्होंने फारस, अफगानिस्तान और रूस जैसे देशों से भी सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया, जो उनके व्यापक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
सह-लेखक मधुर राव ने कहा कि ‘द बैटल ऑफ नरनौल’ जैसी किताबें भारत के इतिहास की उन अनकही कहानियों को सामने लाने का प्रयास हैं, जो समय के साथ भुला दी गईं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे वीरों की गाथाओं को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए और फिल्मों तथा नाटकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन निष्ठा अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर राजस्थान के पूर्व गृह राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया तथा आलसीसर परिवार के मुखिया ठाकुर गज सिंह जी आलसीसर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इसके साथ ही 2-पेजेज बुक क्लब के संस्थापक सदस्य डॉ. राम गुलाटी, प्रग्या रामजेवाल और मोहित बत्रा सहित बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। यह सत्र न केवल इतिहास को समझने का अवसर बना, बल्कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अनदेखे अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा भी देता नजर आया।

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