असर खबर का - मुकुंदरा की जन्नत गरड़िया का हुआ कायाकल्प
उबड़-खाबड़ रास्तों से पर्यटकों को मिली निजात
मुकुंदरा प्रशासन ने सौंदर्यीकरण व आवागमन सुगम बनाने के लिए बजट जारी कर समस्या का समाधान किया।
कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की जन्नत गरड़िया महादेव अब नए स्वरूप में नजर आ रहा है। लाल मुर्रम से सजी ईको टेल और दीवारों पर जंगल का अक्स देख पर्यटक रोमांचित हो उठे। अर्धचंद्राकार आकृति में बलखाती चंबल का अलौकिक सौंदर्य के लिए देश-विदेश में पहचान बना चुका गरड़िया अब नए कलेवर में नजर आने लगा है। यहां बरसों से पर्यटकों के लिए मुसीबत बने उबड़ खाबड़ रास्ते को मुकुंदरा प्रशासन ने लाल मुर्रम बिछाकर आवागमन सुगम कर दिया। वहीं, दीवारों पर वन्यजीवों की पेंटिंग्स बनवाकर सौंदर्यीकरण किया गया है। साथ ही टिकट विंडों पर टाइल्स लगवाकर आधारभूत संचरनाओं में सुधार किया गया । इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए भी उचित व्यवस्थाएं की गई हैं। हालांकि, सुधार कार्य अभी जारी है।
उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलना हो रहा था मुश्किल
गरड़िया महादेव ट्यूरिज्म का डेस्टीनेशन प्वाइंट है। यहां घना जंगल, पहाड़, झरने, पोखर, तालाब और सदानीरा चम्बल और प्रकृति की गोद में पलते सैकड़ों प्रजाति के वन्यजीवों का बसेरा है। ऐसे में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। लेकिन, गरड़िया में चंबल व्यू प्वाइंट तक जाने का रास्ता उबड़ खाबड़ होने से पर्यटकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। वहीं, बाइक सवार गड्ढ़ों में गिरकर चोटिल हो जाते थे। पर्यटकों की परेशानियों को देखते हुए दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया। इसके बाद मुकुंदरा प्रशासन ने सौंदर्यीकरण व आवागमन सुगम बनाने के लिए बजट जारी कर समस्या का समाधान किया।
मुकुंदरा का परिचय दे रही दीवारें
दादाबाड़ी निवासी पर्यटक सुरेश सिंह, प्रहलाद जादौन ने कहा कि पहली बार परिवार के साथ गरड़िया आए हैं, दीवारों पर वन्यजीवों की पेंटिंग्स देख जंगल में आने का अहसास होता है। टिकट विंडों पर रंग बिरंगी टाइल्स लगी होने से सफाई नजर आई। केशवपुरा निवासी छात्र अशोक मेहता, ब्रजेश प्रजापति का कहना था कि पहले टिकट विंडों पर जाने का फाउंडेशन उबड़ खाबड़ था। जिससे टिकट लेने के दौरान विंडो पर पहुंचने में परेशानी होती थी।
हर साल आते हैं लाखों पर्यटक
मुकुंदरा कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गरड़िया महादेव टाइगर रिजर्व का कोर एरिया होने के साथ ट्यूरिज्म प्वाइंट है। यहां देशभर से हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, जिनसे सकरार को एक करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में यहां सुविधाओं का विस्तार किए की सख्त जरूरत थी। टिकट विंडों से गरड़िया मंदिर तक जाने वाला मार्ग पर गड्ढ़े होने से बरसात में पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन, अब विभाग ने लाल मुर्रम बिछाकर उबड़-खाबड़ रास्ते को ईको टेल के रूप में बदल कर पर्यटकों राहत पहुंचाई।
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