नम आंखों से शहीद कालूराम को दी अंतिम विदाई

शहीद कालूराम की शहादत में उमड़ा जनसैलाब

 नम आंखों से शहीद कालूराम को दी अंतिम विदाई

लेह लद्दाख में बीआरओ के आलाधिकारियों सहित सैनिकों द्वारा शहीद को हैड क्वार्टर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। जिसके बाद शहीद के पार्थिव देह को शनिवार को दोपहर बाद फलाइट से दिल्ली हवाई अड्डे पर लाया गया। जहां रविवार को सड़क मार्ग से दोपहर करीब दो बजे उनके पैतृक गांव ऊकरूंद में लाया गया।

मण्डावर। क्षेत्र के ऊकरूंद गांव में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) में 51 आरसीसी 50 बीआरटीएफ हिमांक प्रोजेक्ट में लेह लद्दाख में चालक के पद पर कार्यरत  शहीद जवान कालूराम मीना की शुक्रवार को ह्दधगति रुकने से निधन हो गया। जहां शनिवार को लेह लद्दाख में बीआरओ के आलाधिकारियों सहित सैनिकों द्वारा शहीद को हैड क्वार्टर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। जिसके बाद शहीद के पार्थिव देह को शनिवार को दोपहर बाद फलाइट से दिल्ली हवाई अड्डे पर लाया गया। जहां रविवार को सड़क मार्ग से दोपहर करीब दो बजे उनके पैतृक गांव ऊकरूंद में लाया गया।
जहां गांव में  शहीद कालूराम अमर रहे के नारे गूंजते रहे। 

प्रत्येक शख्स हाथ में तिरंगा लिए भारत माता के जयकारे लगाते हुए नम आंखों से शहीद को श्रद्धांजलि दी गई। ट्रैक्टर-ट्रॉली को दुल्हन की तरह गुब्बारे,रंग-विरंगे कपड़ों के लिवाज से सजाकर शहीद के पार्थिव देह की गांव में परिक्रमा लगाई गई। इस दौरान गांव में महिलाएं घूंघट की आड़ में तिरंगे में लिप्टे शहीद कालूराम को नम आंखों से निहार रही थी। इस दौरान महुवा विधायक  ने भारत माता के जयकारे लगाते हुए शहीद को कंधा दिया। वहीं जब तक सूरज चांद रहेगा शहीद कालूराम तेरा नाम रहेगा के जयकारे लगाए गए। इसके बाद शहीद को उपखण्ड अधिकारी धीरेन्द्र सिंह सोनी, महुवा पुलिस उपाधीक्षक बृजेश कुमार, तहसीलदार जयसिंह चौधरी, थानाधिकारी अनिल कुमार मीणा सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद महुवा पुलिस उपाधीक्षक बृजेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस जवानों ने गार्ड आॅफ आॅनर देकर शहीद के पार्थिव देह की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गइ। इस दौरान शहीद के पुत्र अजय कुमार ने उनको मुखाग्नि दी। शहीद की शहादत में हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम दर्शन के दौरान शहीद के परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था, वहीं शहीद की मां व पत्नी बार-बार बेहोश हो रही थी।


एक बहन व दो भाइयों में सबसे बड़े थे कालूराम: किसान परिवार कैलाश चंद मीणा के एक बेटी व दो बेटे थे। जिनमें कालूराम मीणा सबसे बड़े बेटे थे जिनका जन्म 1 जुलाई 1978 को गांव उकरुंद में हुआ और उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव की ही सरकारी स्कूल में प्राप्त की। उसके बाद 12 तक कि पढ़ाई के लिए गांव के पास मण्डावर कस्बे की सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। जिसके बाद स्नातक तक की पढ़ाई की। जहां वर्ष 2009 में उनकी नौकरी बीआरओ में चालक के पद पर लग गई। जहां उनकी पहली पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में मिली, वही वर्ष 2017 में कालूराम के पिताजी का देहांत हो गया। कालूराम के एक बेटा व दो बेटी है।  

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