4 रुपए की बिजली डिस्कॉम बेच रहा 10 में, फिर भी थर्मल वित्तीय संकट में

डिस्कॉम कम्पनियां थर्मल को नहीं लौटा रही बकाया राशि का भुगतान, कोटा थर्मल के कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों को नहीं मिल रहा वेतन, 2 हजार से ज्यादा ठेका श्रमिकों को 3 माह से नहीं मिला मानदेय, इंजीनियरों व कार्मिकों को नहीं मिली तनख्वाह

4 रुपए की बिजली डिस्कॉम बेच रहा 10 में, फिर भी थर्मल वित्तीय संकट में

कोटा सुपर थर्मल की सभी इकाइयों से लगातार बिजली उत्पादन हो रहा है। नए-नए कीर्तिमान रचे जा रहे हैं। इसके बावजूद थर्मल वित्तीय संकट से जूझ रहा है। हालात यह है, थर्मल में कार्यरत 2 हजार से ज्यादा ठेका श्रमिकों को पिछले 3 माह से वेतन तक नहीं मिला। वहीं, तकनीकी कर्मचारियों को 9 माह से ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया गया।

कोटा। कोटा सुपर थर्मल की सभी इकाइयों से लगातार बिजली उत्पादन हो रहा है। नए-नए कीर्तिमान रचे जा रहे हैं। इसके बावजूद थर्मल वित्तीय संकट से जूझ रहा है। हालात यह है, थर्मल में कार्यरत 2 हजार से ज्यादा ठेका श्रमिकों को पिछले 3 माह से वेतन तक नहीं मिला। वहीं, तकनीकी कर्मचारियों को 9 माह से ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया गया। इसके अलावा अभियंताओं एवं कार्मिकों को मासिक वेतन का भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा। पिछले वर्ष में उत्पादकता पुरस्कार की बकाया राशि 35 लाख का भुगतान भी रोक लिया गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश का भुगतान भी नहीं किया गया है।

थर्मल में यूं बढ़ रही कोयला व वेतन भुगतान की समस्या
राजस्थान विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ की कोटा इकाई अध्यक्ष रामसिंह शेखावत ने कहा कि थर्मल में 2500 से ज्यादा ठेका श्रमिक कार्यरत हैं, जिन्हें तीन माह से समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोटा थर्मल से लगभग 4 रुपए प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली पैदा की जा रही है, जिसे डिस्कॉम द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को 10 रुपए यूनिट की दर से बेचा जाता है। इसके बावजूद डिस्कॉम कम्पनियां विद्युत उत्पादन निगम को बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रही है, जिससे निगम के बिजलीघरों में कोयला संकट सहित वेतन भुगतान की समस्याएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि थर्मल प्रशासन जहां आर्थिक संकट का बहाना कर रहा है, वहीं, दूसरी ओर थर्मल कॉलोनी से प्लांट के लिए बसें संचालित होने के बावजूद अभियंताओं के आवागमन के लिए ठेके पर दर्जनों महंगी कारें चलाई जा रही हैं। सरकारी धन का दुरुपयोग बढ़ रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। 

ठेका श्रमिकों की आर्थिक स्थिति खराब
ठेका श्रमिकों ने बताया कि महंगाई की मार से परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब है। प्रतिमाह किराना, बच्चों की फीस, बिजली के बिल एवं मकान किराया देने के लिए उन्हें उधार लेना पड़ रहा है। वेतन नहीं मिलने से कई मजदूर 6 माह से मकान किराया भी नहीं दे पा रहे। वेतन की मांग करने पर ठेकेदार उन्हें काम से निकालने की धमकी देते हैं। उन्होंने थर्मल प्रशासन से बकाया वेतन शीघ्र दिलवाने की मांग की।

श्रम कानून का हो रहा उल्लंघन
शेखावत ने कहा कि पिछले दिनों संविदा श्रमिक मासिक वेतन नहीं मिलने पर धरना प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन थर्मल प्रशासन के झूठे आश्वासन से हजारों श्रमिकों का मनोबल गिरा है। ठेका मजदूरों को प्रतिमाह समय पर वेतन भुगतान नहीं कर श्रम कल्याण कानून का उल्लंघन किया जा रहा है।

पैसा, हैड ऑफिस जयपुर से ही रुका हुआ है, जिसके कारण कर्मचारियों का वेतन रुका हुआ है। वहीं, ठेकेदार के बिल पास नहीं होने से श्रमिकों का वेतन रुका है। वेतन संबंधी समस्याओं का निराकरण के लिए कोशिश कर रहे हैं। हमने आज ही जयुपर में उच्चाधिकारियों से इस संबंध में बात की है, उन्होंने आश्वस्त किया है कि एक या दो दिन में बजट जारी कर दिया जाएगा। जिससे कर्मचारियों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं, ठेकेदारों के माध्यम से श्रमिकों का रुका मानदेय भी मिल जाएगा। डिस्कॉम कम्पनियां थर्मल को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही, इसका जवाब जयपुर कार्यालय के अधिकारी ही दे पाएंगे।
- वीके गुलानी, चीफ इंजीनियर कोटा थर्मल

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