रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर में सरेआम बनी 2 किमी सड़क, अधिकारियों को होश तक नहीं

सीसीएफ से डीसीएफ तक को भनक तक नहीं

रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर में सरेआम बनी 2 किमी सड़क, अधिकारियों को होश तक नहीं

जेसीबी व डम्परों ने बर्बाद किया जंगल, रौंद दिए पेड़, खोद दी वन भूमि।

कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में दिनदहाड़े  2 किमी लंबी सीसी सड़क बन गई और वन अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। पिछले 20-25 दिनों  से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। दर्जनों जेसीबी से करीब पौने दो हैक्टेयर वनभूमि को खोद सड़क बना डाली। वन्यजीवों का आशियाना उजाड़ दिया और सैंकड़ों पौधे भी नष्ट कर दिए। इसके बावजूद रेंजर से लेकर डीएफओ तक ने सड़क निर्माण रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि, इसी वन भूमि पर गत वर्ष राजनेतिक सभा के लिए टेंट लगाने पर ही वन विभाग ने आयोजक से 2 लाख रुपए जुर्माना वसूला था। विशेषज्ञों का मत है, वन अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं है। बफर क्षेत्र में सड़क बनाना तो दूर कदम भी नहीं रख सकते। दरअसल, मामला बूंदी वन मंडल के डाबी रेंज की जाखमूंड वनखण्ड का है। इसका अधिकांश वनक्षेत्र रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व का बफर है, जो वनमंडल के अधिकार क्षेत्र में आता है। यहां जंगल में बसा रामपुरिया गांव को कोटा-बूंदी हाइवे से जोड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी ने बिना एफसीए-1980 की कार्यवाही किए दो से ढाई किमी की सड़क बना दी। ताज्जुब की बात यह है, सीसीएफ और डीएफओ को पता ही नहीं कि उनके क्षेत्र में सीसी सड़क बन गई। 

एफसीए-1980 की उड़ी धज्जियां
बूंदी वन मंडल की नाक के नीचे आरवीटीआर के बफर एरिया में खुलेआम वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धज्जियां उड़ाई जा रही है और वन विभाग कार्रवाई के बजाए आंखें मूंदे पड़ा है। गत 14 अप्रेल को नवज्योति जाखमूंड वनखंड में पहुंची तो हालात चौंकाने वाले थे। यहां गिट्टियों से भरे दर्जनों डम्पर खाली हो रहे थे और जेसीबी से खुदाई चल रही थी। निर्माण कार्य में लगे श्रमिक व सुपरवाइजर ने बताया कि पीडब्ल्यूडी द्वारा पिछले महीने से सीसी सड़क बनवाई जा रही है। जंगल में पक्की सड़क बनना रैंजर की कार्यशैली सवालों के कठघरे में आती है। 

यह है मामला
डाबी रेंज में स्थित जाखमूंड वनखंड करीब 2276 हैक्टेयर में फैला जंगल है, जो राज्य सरकार से नोटिफाइड है और आरवीटीआर का बफर क्षेत्र है। इसमें रामपुरिया गांव बसा है। जिसे कोटा-बूंदी हाइवे से जोड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी ने दो से ढाई किमी लंबी सड़क बना दी। जबकि, इसके लिए विभाग ने एफसीए-1980 के तहत भूमि डायवर्जन की कार्यवाही नहीं की और न ही वाइल्ड लाइफ क्लियरनेंस ली गई, जो वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है।  यदि, पीडब्ल्यूडी द्वारा एफसीए की कार्यवाही की जाती तो इसकी जानकारी मुख्य संभागीय वन संरक्षक एवं फिल्ड निदेशक व उप वनसंरक्षक बूंदी को होती लेकिन, दोनों ही अधिकारियों ने वनक्षेत्र में सड़क निर्माण की जानकारी होने से इंकार कर दिया।  ऐसे में सवाल उठता है कि पीडब्ल्यूडी ने वनभूमि पर किसकी परमिशन से सड़क बना दी। 

इधर, एयरपोर्ट का काम अटकाया, उधर सड़क बनवा दी
शंभुपुरा में प्रस्तावित ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट की जमीन भी जाखमूंड वनखंड में ही आती है। यहां वन विभाग की कथनी और करनी में अंतर नजर आता है। एक तरफ तो वनभूमि के डायवर्जन व वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस के नाम पर 6 साल से एयरपोर्ट जैसे महत्वकांशी प्रोजेक्ट को अटकाया हुआ है। वहीं, दूसरी ओर इसी वनखंड में एयरपोर्ट की जमीन से सटी वनभूमि पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत डायवर्जन की कार्रवाई किए बिना ही सीसी रोड का निर्माण करवा दिया, जो वन अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। 

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वन संरक्षण अधिनियम 1980 का उल्लंघन जघन्य अपराध 
डाबी रेंज का जाखमूंड वन क्षेत्र रामगढ़ टाइगर रिजर्व का बफर एरिया है। जहां दिनदहाड़े करीब 2 किमी सीसी सड़क बना दी गई। यह सड़क कार्यकारी एजेंसी ने बिना एफसीए-1980 के तहत वनभूमि डायवर्जन किए ही बना दी है, जो वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है। यह वन विभाग की दुनिया का सबसे जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। केंद्रीय व राज्य स्तर के उच्च वन अधिकारियों द्वारा स्थानीय वन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
- देवव्रत सिंह,अध्यक्ष, पगमार्क फाउंडेशन कोटा

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जब सीसीएफ व बूंदी वन मंडल के डीएफओ को प्रोटेक्टेड वनक्षेत्र में सड़क बनने की जानकारी नहीं है तो संबंधित एजेंसी ने किसके आदेश पर सड़क बना दी। बफर क्षेत्र में सड़क बनना वन अधिकारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है। एक तरफ तो भूमि डायवर्जन व वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस के चक्कर में शंभुपुरा एयरपोर्ट का काम 6 साल से अटका रखा है और दूसरी तरफ बिना एफसीए की कार्रवाई के टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में सड़क बना दी। यह गंभीर मामला है, इसकी तह तक जांच होनी चाहिए।
- अजय मीणा, वाइल्ड लाइफ रिसर्चर

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मुझे बूंदी आए अभी 15 दिन ही हुए हैं। आपके द्वारा ही जानकारी मिल रही है। वैसे जाखमूंड वनक्षेत्र में सीसी सड़क बन रही है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
- वीरेंद्र सिंह कृष्णिया, उप वन संरक्षक बूंदी वन मंडल

डाबी रेंज के जाखमूंड वनखंड में सीसी सड़क बनने की मुझे जानकारी नहीं है। इस तरह की सड़क बनाए जाना मेरे संज्ञान में नहीं आया। बूंदी डीएफओ से मालूम कर मामले का पता करेंगे। 
- रामकरण खैरवा, मुख्य वनसंरक्षक एवं संभागीय फिल्ड निदेशक, कोटा वन विभाग 

रामगढ़ टाइगर रिजर्व में दो तरह के क्षेत्र आते हैं, पहला-कोर एरिया होता है, जो मेरे अधिकार क्षेत्र में आता है और दूसरा-बफर क्षेत्र है, लेकिन यह बूंदी वन मंडल के अधिकार में आता है। यहां सड़क बनने संबंधित जानकारी वहां के डीएफओ ही दे सकते हैं। 
- संजीव शर्मा, उपवन संरक्षक, रामगढ़ टाइगर रिजर्व बूंदी

जाखमूंड वनक्षेत्र स्थित रामपुरिया गांव की सीसी सड़क कितने किमी की और कब से बनाई जा रही है यह शुक्रवार को वर्कआॅर्डर देखकर बताऊंगा। वहीं, एफसीए कार्यवाही के बारे में अभी नहीं सुबह बताऊंगा। कल बात करना।
- राजाराम मीणा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी विभाग बूंदी

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