श्यामलदास दधवाड़िया : पृथ्वीराज रासो की विश्वसनीयता को नकारने वाला इतिहासकार
उन्होंने मेवाड़ के इतिहास पर 4 खंड के ग्रंथ वीर विनोद की रचना की
जयपुर। क्या हम जानते हैं, अकबर की जन्मतिथि और जन्मस्थान के बारे में पहली बार सप्रमाण जानकारी उपलब्ध करवाने वाले इतिहासकार और कुशल प्रशासक मेवाड़ के कविराजा श्यामलदास दधवाड़िया थे। वे न सिर्फ इतिहासकार थे बल्कि एक कुशल प्रशासक भी थे। प्रशासक के तौर पर उन्होंने मेवाड़ राज्य के खिलाफ बाँसवाड़ा और डूंगरपुर के विद्रोह को भी दबाया।
उन्होंने मेवाड़ के इतिहास पर 4 खंड के ग्रंथ वीर विनोद की रचना की। इस ग्रंथ में मेवाड़ के इतिहास,समाज और कृषि व्यवस्था की तो जानकारी मिलती ही है, साथ ही भारत के भूगोल की भी जानकारी मिलती है।
इतिहास लेखन के लिए कविराज ने 22 लोगों की टीम का चुनाव किया। इन 22 लोगों में की टीम में शिलालेख पढ़ने का काम गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने किया जिन्होंने आगे चलकर राजस्थान के इतिहास में मुक्कमल स्थान प्राप्त किया। कविराज ने पृथ्वीराज रासो की विश्वसनीयता को नकारते हुए, उसे 14वीं शताब्दी का ग्रंथ बताया। इसके लिए उन्हें अंग्रेज सरकार ने महामहोपाध्याय की उपाधि से नवाजा।
कविराज के प्रिय मित्र कृष्णदेव बारहठ थे। दोनों मित्र महर्षि दयानंद सरस्वती से बहुत प्रभावित थे। कविराज की पाठशाला के विद्यार्थी प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह बारहठ थे। कविराज श्यामलदास और मेवाड़ महाराणा सज्जन सिंह की मित्रता काफी गहरी थी। मेवाड़ महाराणा की मृत्यु के बाद उनकी याद में रोते-रोते कविराज की आँखों की रोशनी चली गयी।
इतिहास की विडंबना ही है कि मेवाड़ के लिए इतने बड़े ग्रंथ को रचने वाले इतिहासकार के ग्रंथ को प्रतिबंधित भी मेवाड़ राज्य ने ही किया। साहित्यकार चंद्र प्रकाश देवल बताते हैं कि कर्नल टॉड के बाद राजस्थान के इतिहास पर काम करने वाले व्यक्ति श्यामलदास ही थे। राजस्थान के रजवाड़ों में तर्कपूर्ण इतिहास लिखने की परंपरा अगर कहीं से शुरू होती है तो वह कविराज श्यामलदास के साथ ही होती है।

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