मिट्टी जांच बनी दिखावा, प्रयोगशालाओं पर लगा ताला

कहीं पर पद स्वीकृत नहीं तो कहीं स्टॉफ की कमी, जांच में खेतों के पोषक तत्वों का लगता है पता

मिट्टी जांच बनी दिखावा, प्रयोगशालाओं पर लगा ताला

किसानों को मिटटी जांच के लिए जिला स्तरीय प्रयोगशाला पर निर्भर रहना पड़ता है। इस कारण रिपोर्ट के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है।

कोटा । मिट्टी की जांच के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर प्रयोगशालाएं तो खोल दी गई, लेकिन करीब आधी बंद पड़ी है। प्रदेश में करीब 14 प्रयोगशालाएं ऐसी है, जहां पर अभी तक पद ही स्वीकृत नहीं हुए हैं। इनमें हाड़ौती की एक प्रयोगशाला भी शामिल हैं। इस कारण किसान मिट्टी की जांच के लिए भटकने को मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार एक प्रयोगशाला को शुरू करने में करीब 20 से 25 लाख रुपए का खर्चा आता है। खेती-बाड़ी कीर उपज बढ़ाने के लिए मिट्टी की जांच करवाई जाती है। जांच में कम मात्रा मिलने के बाद पोषक तत्वों वाली खाद व मिट्टी का उपयोग किया जाता है। इसके बाद खेतों की भूमि को उपजाऊ बनाया जाता है ताकि फसलों को उत्पादन बेहतर हो सके। 55 में से मात्र 24 ही चालू: जानकारी के अनुसार प्रदेश में जिला मुख्यालयों सहित ब्लॉक स्तर पर भी प्रयोगशालाएं खोली गई थी। इसके तहत प्रदेशभर में 55 प्रयोगशालाएं मिट्टी की जांच के लिए खुली थी। इनमें से सिर्फ 24 प्रयोगशालाएं ही अभी चालूू हैं। वहीं ब्लॉक स्तर पर खोली गई 14 प्रयोगशालाओं में आज तक भी पद स्वीकृत नहीं हो पाए हैं। ये नई प्रयोगशालाएं अभी तक बंद पड़ी है।  इस कारण मिट्टी की समय पर जांच करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। मिट्टी की जांच करवाने से खेतों में फसलों के उत्पादन की क्षमता का पता लग जाता है। वहीं किसी भी पोषक तत्व की कमी होने के बाद कृषि पर्यवेक्षकों की सलाह पर उनकी पूर्ति की जाती है।

कोटा संभाग में पांच  प्रयोगशालाएं बंद
जानकारी के अनुसार कोटा संभाग सहित प्रदेश में अधिकांश प्रयोगशालाएं बंद पड़ी हुई है। कोटा संभाग में छबड़ा, सीसवाली,, केशवरायपाटन, भवानीमंडी, अकलेरा में काफी समय से प्रयोगशालाएं बंद पड़ी है। इसके अलावा सागवाड़ा, कुम्हेर, फलौदी, बालोतरा, डीग, बयाना, नदबई, बडौदामेव, बाड़ी, नीम का थाना, बाली, सोजत, रेवदर, गुलाबपुरा, गंगापुर, कोटडी, करणपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, गरियावद, खडार, बेंगू, नोहर, भीनमाल और सूरजगढ़ की प्रयोगशालाआेंं पर ताला लगा हुआ है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसानों को मिटटी जांच के लिए जिला स्तरीय प्रयोगशाला पर निर्भर रहना पड़ता है। इस कारण रिपोर्ट के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है।

पद ही स्वीकृत नहीं किया
जानकारी के अनुसार मिट्टी जांच को गति देने के लिए सरकार ने ब्लॉक स्तर पर भी प्रयोगशालाएं खोली थी, लेकिन इन प्रयोगशालाओं में पद ही स्वीकृत नहीं किए गए। इस कारण इन प्रयोगशालाओं का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। कोटा जिले के सांगोद सहित प्रतापगढ़, केकड़ी, दूनी, गुडामलानी, हिण्डोन, सांचौर, कुचामन, लाडनू, श्रीमाधोपुर, लक्ष्मणगढ़, श्रीडूंगरगढ़, सांडवा और जेतरण में पद स्वीकृत नहीं होने से किसानों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक प्रयोगशाला में करीब 6 कर्मचारी होने जरूरी हैं, लेकिन जिला मुख्यालयों को छोड़कर कहीं भी इतने कार्मिक नहीं हैं। अधिकांश प्रयोगशालाओं में एक-एक कार्मिक ही लगे हुए हैें।

फैक्ट फाइल
14 प्रयोगशालाओं में पद स्वीकृत नहीं
31 प्रयोगशालाओं पर लगा है ताला
06 कर्मचारी प्रयोगशाला में होना जरूरी
30 लाख खर्च होता है एक प्रयोगशाला में- 

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सरकार ने ब्लॉक स्तर पर प्रयोगशालाएं तो खोल दी, लेकिन किसी में कर्मचारी कम हैं तो कोई बंद पड़ी हुई है। सांगोद क्षेत्र की प्रयोगशाला में पद स्वीकृत नहीं होने के कारण उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- जोगेन्द्र सिंह, किसान

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प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों की नियुक्ति सरकार के स्तर पर की जाती है। वहीं से पद भी स्वीकृत किए जाते हैं। इस सम्बंध में ज्यादा जानकारी कृषि निदेशालय से ही मिल सकती है।
- गोविन्द कुमार, कृषि पर्यवेक्षक

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