बसों में मेंटीनेंस के नाम पर 3.50 करोड़ रुपए खर्च, सड़कों पर हो रहे ब्रेक डाउन

बसों की सही से मेंटीनेंस नहीं हो रहा

बसों में मेंटीनेंस के नाम पर 3.50 करोड़ रुपए खर्च,  सड़कों पर हो रहे ब्रेक डाउन

शहर में संचालित सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (जेसीटीएसएल) की बसों पर मेंटीनेंस के नाम से हर माह करीब 3.50 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है, लेकिन इन बसों की सही से मेंटीनेंस नहीं हो रहा।

जयपुर। शहर में संचालित सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (जेसीटीएसएल) की बसों पर मेंटीनेंस के नाम से हर माह करीब 3.50 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है, लेकिन इन बसों की सही से मेंटीनेंस नहीं हो रहा। इसके चलते आए दिन सड़कों पर बसों के ब्रेक डाउन हो रहे है। इसके चलते आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जेसीटीएसएल के पास कुल 305 छोटी-बड़ी बसें है।

विद्याधर नगर और टोडी डिपो से मातेश्वरी और बगराना डिपो से पारस ट्रेवल्स कंपनी संचालन व मेंटीनेंस का कार्य करती है। कुछ चालकों ने भी इन बसों को लेकर प्रशासन को भी शिकायत की थी, लेकिन कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। हाल ही में दो बसें ब्रेक फेल होने से दीवार में टकराई थी।

किस कंपनी को कितना भुगतान
विद्याधर नगर डिपो की बसों के लिए प्रतिमाह 90 लाख रुपए मातेश्वरी कंपनी को, टोडी डिपो की बसों के मेंटीनेंस के लिए 1.60 करोड़ रुपए मातेश्वरी कंपनी को और बगराना डिपो की बसों के मेंटीनेंस के लिए एक करोड़ रुपए पारस ट्रेवल्स कंपनी कंपनी को प्रतिमाह का देती है। यह काम जेसीटीएसएल प्रशासन खुद करें तो शायद बसों की मेंटीनेंस व रखरखाव सही तरीके से हो सकता है।

चालकों को भेजा दूसरे विभागों में
जेसीटीएसएल के पास कुल 1125 चालक-परिचालक है। इनमें से 588 परिचालक व 537 चालक है। जेसीटीएसएल ने 537 चालकों में से 417 चालकों को दूसरे विभागों में डेपुटेशन पर भेज रखा है। वहीं कंपनी के प्राइवेट चालकों से बसों का संचालन करवाया जा रहा है।

फैक्ट फाइल
- कुल बसें: 305
- टोडी डिपो से संचालित: 127
(इनमें 92 बड़ी व 35 मिनी बसें)
- विद्याधर से: 78 बसें
- बगराना से: 100 मिडी बसें
- प्रतिदिन राजस्व:  26.50 लाख
- प्रतिदिन यात्रीभार: 2.5 लाख

इनका कहना
बसों की मेंटीनेंस का कार्य कर रही कंपनियों के कार्य का समय-समय पर जांच होती है। हाल ही में बसों के ब्रेक फेल होने के मामले में जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
- आशीष कुमार, ओएसडी जेसीटीएसएल

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